पैथोलॉजी रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल, कोर्ट ने कहा—सही रिपोर्ट पाना लोगों का अधिकार
जबलपुर। पैथोलॉजी लैब में दी जा रही रिपोर्ट्स की विश्वसनीयता को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने साफ कहा कि लोगों को सही और विश्वसनीय मेडिकल रिपोर्ट मिलना उनका मौलिक अधिकार है और इस मामले में सरकार की चिंता पूरी तरह जायज है। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कई अहम सवाल उठाए और सभी पक्षों से सुधार के सुझाव मांगे। इस अहम मामले में अगली सुनवाई 12 मई 2026 को होगी।
कोर्ट का बड़ा सवाल: “एक दिन में कितनी रिपोर्ट संभव?”
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बेहद अहम और सीधा सवाल किया, “एक पैथोलॉजिस्ट एक दिन में कितनी रिपोर्ट दे सकता है?” कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां एक ही पैथोलॉजिस्ट 26 अलग-अलग लैब्स में रिपोर्ट साइन कर रहा है। यह बेहद चिंताजनक है।
सरकार के नियम से जुड़ा है मामला
मामला राज्य सरकार के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एक पैथोलॉजिस्ट को अधिकतम 2 लैब तक सीमित किया गया है। इस आदेश को अलग-अलग संगठनों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिनमें महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट, एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिशनर्स, मेडिकल लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और नर्सिंग होम्स एसोसिएशन, जबलपुर शामिल हैं। कुछ याचिकाकर्ता इस नियम का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इसका विरोध कर रहे हैं।
जमीनी हकीकत: नियम हैं, पालन नहीं
याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि सरकार ने 22 अक्टूबर 2024 को नियम बनाए और सिर्फ पोस्ट ग्रेजुएट पैथोलॉजिस्ट को लैब संचालन का अधिकार दिया, लेकिन अभी भी कई जगह पर गैर-योग्य टेक्नीशियन लैब चला रहे हैं। अपंजीकृत लोग रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
“शाम को आकर सिर्फ साइन करते हैं”
कोर्ट ने एक आम धारणा पर भी टिप्पणी कर कहा कि “टेक्नीशियन दिन भर जांच करते हैं और पैथोलॉजिस्ट शाम को आकर सिर्फ साइन कर देते हैं।” अगर यह सच है, तो यह मेडिकल एथिक्स और मरीजों की सुरक्षा दोनों के खिलाफ है।
सरकार को है मरीजों की चिंता: कोर्ट
कोर्ट ने स्पष्ट किया सरकार का उद्देश्य डॉक्टरों के अधिकार कम करना नहीं बल्कि मरीजों को सही रिपोर्ट सुनिश्चित करना है। इसलिए कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा कि आप सभी बताएं कि सिस्टम में क्या सुधार किए जा सकते हैं। आप ऐसे सुझाव दें जिन्हें लागू किया जा सके।
क्यों अहम है यह मामला?
यह सिर्फ एक नियम या प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि
- मरीजों की सही डायग्नोसिस
- गलत रिपोर्ट से गलत इलाज का खतरा
- पूरे हेल्थ सिस्टम की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।
