LAW'S VERDICT

स्टेट बार कॉउंसिल चुनाव: स्पेशल कमेटी ने प्रशांत दुबे को बनाया सेक्रेटरी

जस्टिस दिवाकर कमेटी  के सुपरविज़न में चल रही नए चुनाव की तैयारियां 

जबलपुर।  मप्र स्टेट बार कॉउंसिल चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की हाई पावर स्पेशल कमेटी के सुपरविज़न में नए चुनाव की तैयारियां चल रहीं हैं। इस स्पेशल कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस केके त्रिवेदी और वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ भी शामिल हैं। नए चुनाव को संपन्न कराने कमेटी ने फिलहाल प्रशांत दुबे को सेक्रेटरी नियुक्त किया है। इसके साथ ही उप चुनाव अधिकारी के रूप में अधिवक्ता ज्ञानेंद्र सिंह बघेल और दीपक अवस्थी को चुनाव के लिए उप चुनाव अधिकारी बनाया गया है। स्पेशल कमेटी ने स्टेट बार कॉउंसिल को चुनाव के लिए जारी किये गए 1 करोड़ रूपए के फण्ड में से 50 लाख रूपए की राशि ट्रांसफर करने कहा है, ताकि चुनाव की प्रक्रिया निर्बाध्य रूप से जारी रह सकें। बार कॉउंसिल ने चुनाव के लिए 1 करोड़ रूपए के बजट का अनुमान किया था। उम्मीद की जा रही है कि गुरुवार को यह राशि ट्रांसफर कर दी जायेगी।   

जारी हुई अधिसूचना 

जस्टिस एसके पालो द्वारा जारी चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 27 फरवरी को नए चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है। 16 मार्च को प्रारम्भिक मतदाता सूची का प्रकाशन होने के बाद 24 मार्च तक आपत्तियां बुलाई जाएंगी। आपत्तियों के निराकरण करने के बाद 1 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी और फिर 8 से 10 अप्रैल तक उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 15 और 16 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होने के बाद 17 अप्रैल को उम्मीदवारों की सूची जारी होगी। 20 अप्रैल से 22 अप्रैल की शाम 4 बजे तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद 22 अप्रैल की शाम 5 बजे उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की जायेगी।  12 मई को मतदान होगा और फिर 16 जून से वोटों की गिनती शुरू होगी।

नियमित सचिव की परीक्षा 15 को 

वहीं स्टेट बार कॉउंसिल द्वारा नियमित सेक्रेटरी की नियुक्ति की प्रक्रिया अलग से की जा रही है, जिसकी परीक्षा आगामी 15 मार्च को धर्म शास्त्र यूनिवर्सिटी में होगी। नए सेक्रेटरी के गठन के लिए स्टेट बार कॉउंसिल ने जस्टिस एचपी सिंह की अध्यक्षता में कमेटी का गठन भी किया है, जो इस चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देगी। यहाँ उल्लेखनीय है कि स्टेट बार कॉउंसिल में गीता शुक्ला को आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन देकर बाबू से सेक्रेटरी बनाए जाने के फैसलों को मप्र हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। साथ ही बार कॉउंसिल को कहा था कि सेक्रेटरी पद पर नई नियुक्ति करने कॉउंसिल विधिवत प्रक्रिया अपनाये। हाईकोर्ट के फैसले को गीता शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उनकी याचिका पहली ही सुनवाई पर खारिज कर दी गई थी।

 

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