सरकार के 18 हजार पन्नों के जवाब में बताया गया आखिर क्यों बुलाना पड़ा CAD सॉफ्टवेयर के लिए नया ठेका
जबलपुर। प्रदेश की आपातकालीन सेवा से जुड़े डायल 112 के ठेके को लेकर तेलंगाना की कंपनी EMRI Green Health Services ने मप्र हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है। इस याचिका में Police Telecommunication HQ द्वारा 31 दिसंबर 2025 को “ऑटोमैटिक कंप्यूटर एडेड डिस्पैच सिस्टम” की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, इंटीग्रेशन और मेंटेनेंस के सम्बन्ध में जारी किये गए 6 करोड़ रुपए के नए ठेके को चुनौती दी गई थी। कंपनी का दावा था कि जब यही काम वह पहले से ही उसे सौंपा जा चुका है, तब बिना किसी कारण के CAD सॉफ्टवेयर का नया ठेका जारी करना अनुचित है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच इस मामले में सरकार के रवैये को जमकर आड़े हाथ ले रही थी। कंपनी ने बिना कोई कारण बताये 25 फरवरी को अचानक इस मामले को हाईकोर्ट से वापस लिया तो सवाल यही उठा कि कंपनी ने आखिर ऐसा क्यों किया? हालंकि कंपनी ने इसकी किसी भी वजह का हाईकोर्ट में कोई खुलासा नहीं किया। जब Law's Verdict द्वारा पड़ताल की गई तो पता चला कि राज्य सरकार द्वारा पेश किये गए 15 और 3 (कुल 18) हजार पन्नों के जवाब के चलते तेलंगाना की कंपनी ने अपनी याचिका वापस ली है। सरकार के इस भारी भरकम जवाब में आपातकालीन सेवाओं में तेलंगाना की कंपनी की कमियों को प्रमुखता और सिलसिलेवार तरीके से बताया गया था। सूत्र बताते हैं कि यदि सरकार के जवाब पर हाईकोर्ट विचार करती तो तय था कि डिवीज़न बेंच द्वारा दिए जाने वाले फैसले का सीधा असर कंपनी द्वारा देश के अन्य 23 राज्यों में संचालित किये जा रहे ठेकों पर पड़ता और यहाँ मप्र में भी उसकी सरकार से ठन जाती। उसी से बचने तेलंगाना की कंपनी ने बैकफुट पर जाकर याचिका को वापस लेना सही समझा। इस याचिका के वापस होने पर बेंच ने टिप्पणी भी की थी कि कंपनी ने 6 करोड़ रुपए के विवाद से जुड़े इस मुद्दे को छोड़कर अपने 972 करोड़ रूपए के ठेके को बचा लिया।
972 करोड़ रूपए का है मध्य प्रदेश का ठेका
तेलंगाना की कंपनी EMRI Green Health Services को मप्र में आपातकालीन सेवा 112 का यह ठेका मिला था। डायल 112 भारत में इमरजेंसी सेवाओं के लिए एक एकीकृत नंबर है। इस नंबर को डायल करते ही पुलिस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड से तुरंत सहायता प्रदान की जाती है। यह कंपनी फिलहाल देश के 23 राज्यों में आपातकालीन सेवाएं दे रही है। इस मामले पर मप्र हाईकोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान सरकार के रवैये को आड़े हाथों लेते हुए सरकार को जवाब देने कहा था। इसके बाद सरकार द्वारा दिए गए भारी भरकम जवाब के चलते याचिका वापस ले ली गई।
EMRI को मिले ठेके पर जल्द आएगा हाईकोर्ट का फैसला
यहाँ उल्लेखनीय है कि तेलंगाना की कंपनी EMRI Green Health Services को मप्र में मिले डायल 112 के ठेके के खिलाफ एक याचिका हाईकोर्ट में पहले से लंबित है। बीवीजी इंडिया लिमिटेड पुणे की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि मप्र में उसने डायल 112 की सेवाओं का संचालन 10 वर्षों तक किया है। डायल 112 के सिस्टम इंटीग्रेटर फेस-2 का नया टेण्डर 12 मार्च 2025 को जारी किया गया। इस प्रक्रिया में तेलंगाना की ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विस (सिकंदराबाद) को सफल मानकर सरकार ने टेण्डर जारी किया। बीवीजी कंपनी का आरोप है कि सिकंदराबाद की कंपनी ने टेण्डर में फर्जी दस्तावेज लगाए हैं, इसलिए उसको अयोग्य घोषित होना चाहिए। बीवीजी इंडिया लिमिटेड की इस याचिका पर मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच में 17 अक्टूबर 2025 को सुनवाई पूरी हो गई थी। उम्मीद की जा रही है कि डिवीज़न बेंच जल्द ही इस याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी।
सरकार ने मजबूती से रखा पक्ष
इस मामले पर राज्य सरकार ने पूरी मजबूती के साथ अपना पक्ष हाईकोर्ट में रखा। शासन ने 18 हजार पन्नों के विस्तृत जवाब में सिलसिलेवार तरीके से बताया कि आपातकालीन सेवा के इस ठेके में कुछ खामिया थीं, जिसको दूर करने CAD सॉफ्टवेयर के ठेके को फिर से जारी किया गया।
अभिजीत अवस्थी, उप महाधिवक्ता, मप्र शासन
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