LAW'S VERDICT

कलेक्टर को नहीं था चार्जशीट देने का हक, बाबू के खिलाफ कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

छिंदवाड़ा के एक सहायक ग्रेड-3 की याचिका पर दिया अंतरिम आदेश 

जबलपुर।  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा के एक सहायक ग्रेड-3 के खिलाफ वहां के कलेक्टर द्वारा जारी की गई चार्जशीट पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस एमएस भट्टी कीअदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक 21 अगस्त 2023 की चार्जशीट के आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
छिंदवाड़ा में रहने वाले अनिल कुडोपा की ओर से याचिका में कहा गया है कि कलेक्टर को तृतीय श्रेणी कर्मचारियों, जिनमें शिक्षक और लिपिकीय वर्ग शामिल हैं, के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। वर्ष 1996 के परिपत्र के तहत कलेक्टर को कुछ अधिकार दिए गए थे, लेकिन 22 अगस्त 2008 के संशोधित परिपत्र में स्पष्ट किया गया कि तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण (Joint Director, Public Instructions) को होगा।
याचिका में कहा गया कि जब सक्षम प्राधिकारी कोई अन्य अधिकारी है, तो कलेक्टर द्वारा जारी की गई चार्जशीट अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए। इसी प्रकार के मामले में इंदौर खंडपीठ द्वारा Sunil Lalge Vs. State of M.P. & others में भी विचार किया जा चुका है।
प्राथमिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी ने पक्ष रखा।  सुनवाई के बाद अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। सात कार्य दिवस के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने को कहा गया है और तीन सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। तब तक शिक्षक के खिलाफ प्रस्तावित विभागीय कार्रवाई पूरी तरह स्थगित रखने कहा गया है।   

हाईकोर्ट का आदेश देखें   WP-5242-2026

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