LAW'S VERDICT

‘दोषी अफसरों को बचा रही है सरकार?’

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी से मांगा हलफनामा

ग्वालियर। एक जमीन से जुडी मप्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए मप्र हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक ओर सरकार राज्य के हितों की रक्षा की बात कर रही है, लेकिन उसके व्यवहार से ऐसा प्रतीत होता है कि दोषी अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की सिंगल बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि क्या राज्य के वरिष्ठ अधिकारी भी इन अधिकारियों के साथ मिलीभगत में हैं, यह विषय मुख्य सचिव द्वारा विचार किया जाना चाहिए। बेंच ने इस मामले को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग से प्रमुख सचिव एम सेल्वेन्द्रम को हलफनामा पेश करने कहा है, जिस पर 11 मार्च को होने वाली सुनवाई पर विचार किया जाएगा। 

मृत महिला के खिलाफ सरकार ने लगाई है याचिका 

एक जमीन से जुड़े मामले को लेकर राज्य सरकार ने एक अपील हाईकोर्ट में दाखिल की थी। 27 अक्टूबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया था कि सरकार ने वर्ष 2012 में जो अपील छोटी बाई के खिलाफ दाखिल की थी, उसका निधन 10 सितम्बर 2011 को हो चूका है। वह अपील तकनीकी कारणों से 16 सितम्बर 2013 को ख़ारिज होने पर राज्य सरकार ने यह मामला दाखिल किया था, ताकि मूल अपील सुनवाई के लिए रेस्टोर हो सके। अदालत द्वारा अपनाये गए कड़े रुख के बाद सरकार ने स्व. छोटी बाई के उत्तराधिकारियों को मामले में पक्षकार बनाने की अर्जी अप्रैल 2024 में दाखिल की थी।

महाधिवक्ता कार्यालय की भूमिका पर उठाये थे सवाल 

27 अक्टूबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस अहलूवालिया की सिंगल बेंच ने सरकार और उसके लॉ ऑफिसरों की भूमिका को जमकर आदेश हाथों लिया था। कोर्ट ने कहा था की प्रदेश सरकार का ग्वालियर में स्थित महाधिवक्ता कार्यालय कानून के अनुसार काम नहीं कर रहा। बेंच ने यहाँ तक कहा था कि राज्य के अधिकारी जानबूझकर या लापरवाही से केस को कमजोर कर रहे हैं और ऐसा लगता है कि तकनीकी आधार पर राज्य की अपील को खारिज कराने की कोशिश की जा रही है। बेंच ने इस मामले के दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यारा पेश करने कहा था

रिकॉर्ड पर पेश नहीं किया कार्रवाई का आदेश 
मामले पर बीते सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि 8 फरवरी 2026 को अजय देव शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया था और 12 फरवरी 2026 के आदेश से जांच अधिकारी व प्रेजेंटिंग ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। हालांकि अदालत ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि यह आदेश होने के बावजूद इसे पहले दायर हलफनामे के साथ रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने राज्य सरकार की मांग स्वीकार करते हुए 12 फरवरी 2026 के आदेश की प्रति सामान्य प्रशासन विभाग भोपाल के  प्रिंसिपल सेक्रेटरी के हलफनामे के साथ पेश करने का निर्देश दिया। कार्रवाई का ब्यौरा पेश करने अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को होगी, जबकि मूल मामले पर आगे की सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

हाईकोर्ट का आदेश देखें   MCC-278-2013

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