LAW'S VERDICT

चार दिन में जबलपुर के दूसरे टीआई पर हाईकोर्ट की मार: केस डायरी में गफलत पर ₹10,000 जुर्माना

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए चार दिनों के भीतर जबलपुर जिले के दूसरे थाना प्रभारी (टीआई) पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने हत्या के एक मामले में केस डायरी पेश करने में गफलत करने को गंभीर त्रुटि मानते हुए खितौला थाने के विवेचना अधिकारी के खिलाफ यह कार्रवाई की।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एसएन भट्ट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत में अधूरी या अपूर्ण केस डायरी पेश करना न्यायिक प्रक्रिया में बाधा है। इससे पहले भी इसी तरह की लापरवाही पर शहपुरा थाना के टीआई प्रवीण धुर्वे पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया जा चुका है।

 क्या था पूरा मामला?

खितौला थाना क्षेत्र में 11 दिसंबर 2025 को धर्मेन्द्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में सिहोरा के पठानी मोहल्ले निवासी हर्ष कुशवाहा को 15 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया। विवेचना पूर्व टीआई रमन सिंह मरकाम द्वारा की गई थी।

आरोपी की दलील

आरोपी की और से अधिवक्ता सौरभ भूषण श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि आरोपी हर्ष 15 दिसंबर 2025 से जेल में है। चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। हर्ष मुख्य आरोपी नहीं, बल्कि उसपर सिर्फ मोबाइल रखने का आरोप है। घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। 

आरोपी की सीधी भूमिका नहीं 

सुनवाई के बाद दिए फैसले में कोर्ट ने माना कि आरोपी की उम्र 25 वर्ष है। घटना में उसकी सीधी भागीदारी नहीं दिखती। उससे सिर्फ मोबाइल की बरामदगी हुई है। ट्रायल में समय लगेगा। इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि  “Bail is the rule, jail is the exception” (जमानत नियम है, जेल अपवाद) है।  इसके मद्देनजर भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कोर्ट ने हर्ष की जमानत अर्जी मंजूर की।

कोर्ट की सख्ती: I.O. पर जुर्माना

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया की पहले राज्य पक्ष ने कहा कि केस डायरी उपलब्ध नहीं है। बाद में वही डायरी प्रस्तुत कर दी गई।  इस लापरवाही पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि बार-बार ऐसी गलती से सुनवाई प्रभावित होती है।  फलस्वरूप कोर्ट ने जांच अधिकारी पर ₹10,000 का जुर्माना लगाते हुए यह राशि 7 दिन में जमा करने का आदेश दिया। साथ ही विवेचना अधिकारी को दोबारा गलती करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी नहीं दी।  


हाईकोर्ट का आदेश देखें        MCRC-13209-2026

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