LAW'S VERDICT

कम नहीं हो रहीं शाजापुर कलेक्टर रिजु बाफना की मुश्किलें, हाईकोर्ट ने पूछा- बिना जांच कैसे की कार्रवाई?

कलेक्टर को व्यक्तिगत शपथ पत्र पेश करने 15 दिनों की मोहलत, सुनवाई 4 सप्ताह बाद 

इंदौर। शाजापुर कलेक्टर रिजु बाफना की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। अभी जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही को हटाने का विवाद थमा भी नहीं है और अब एक नया विवाद सामने आ गया। शाजापुर के राजस्व विभाग में पदस्थ एक एक असिस्टेंट ग्रेड-3 ने बिना विभागीय जांच के बड़ी सजा (Major Penalty) देने वाले शाजापुर कलेक्टर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने न सिर्फ याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी विवादित आदेशों पर अंतरिम रोक लगाई, बल्कि कलेक्टर रिजु बाफना को व्यक्तिगत शपथ-पत्र  देकर यह बताने कहा है कि बिना किसी जांच के उन्होंने याचिकाकर्ता पर कैसे मेजर पेनाल्टी लगाई? शपथपत्र पेश करने कलेक्टर को 15 दिनों की मोहलत दी गई है। अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी। 

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता जयंत बघेरवाल, जो कि राजस्व विभाग में Assistant Grade-3 के पद पर कार्यरत हैं, पिछले 30 वर्षों से बेदाग सेवा दे रहे हैं। उनके खिलाफ 19 दिसंबर 2024 को एक ठेकेदार द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। याचिकाकर्ता बघेरवाल का कहना है कि उन्होंने इसी ठेकेदार के खिलाफ पहले FIR दर्ज कराने और ₹7.85 लाख की वसूली की कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद यह शिकायत दुर्भावनापूर्ण तरीके से की।

बिना चार्जशीट सीधे दी गई सजा  

मामले में याचिकाकर्ता का कहना है कि 24 दिसंबर 2024 को उसे केवल एक शो-कॉज नोटिस जारी किया गया।इसके संबंध में कोई विधिवत चार्जशीट जारी नहीं की गई। ऐसी कार्रवाई M.P. Civil Services (CCA) Rules, 1966 का सीधा उल्लंघन है। इसके बावजूद विभागीय जांच पूरी कर ली गई।

जांच में रिश्वत के आरोप साबित नहीं

जांच अधिकारी ने अपनी 9 जनवरी 2025 की रिपोर्ट में साफ कहा था कि ₹35,000 और ₹15,000 की रिश्वत के आरोप साबित नहीं हुए। फिर भी अधिकारियों ने याचिकाकर्ता पर दो वेतनवृद्धि रोकने की सजा दे दी, जो कि कानूनन बड़ी सजा (Major Penalty) मानी जाती है।

वीडियो सबूत भी रिकॉर्ड में नहीं

याचिकाकर्ता का यह भी दावा है कि जांच में उन्हें गवाहों से जिरह (cross-examination) का मौका नहीं दिया गया। जिस कथित वीडियो रिकॉर्डिंग को आधार बनाया गया, वह रिकॉर्ड में ही मौजूद नहीं हैं। इस कार्रवाई के चलते याचिकाकर्ता को 30 साल की सेवा पूरी होने पर मिलने वाला Time-Scale Pay भी नहीं दिया गया। साथ ही उन्हें SDO कार्यालय, गुलाना (शाजापुर) में अटैच कर दिया गया। इस पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाकर यह याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई।

कलेक्टर ने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया 

मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता यश नागर ने पक्ष रखा। जस्टिस जेके पिल्लई  ने प्रारंभिक सुनवाई में माना कि कलेक्टर ने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण (exceeded jurisdiction) किया। बिना विभागीय जांच के बड़ी सजा देना कानून के खिलाफ है और विवादित आदेश बिना उचित विचार (non-application of mind) के पारित हुआ है।

सभी आदेशों पर लगाई रोक 

प्रारम्भिक सुनवाई के बाद जस्टिस पिल्लई की कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ  27.02.2025, 28.02.2025 और 11.12.2025 के सभी आदेशों पर रोक लगा दी। साथ ही कलेक्टर शाजापुर को 15 दिन में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।  


हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-8568-2026

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