LAW'S VERDICT

हाईकोर्ट ने नरसिंहपुर एसपी से पूछा- “बिना FIR कैसे हुई जांच?”

मर्डर के संदेह से जुड़े मामले में पुलिस अधीक्षक को शपथपत्र पर जवाब देने के निर्देश 

जबलपुर। एक व्यक्ति की हुई संदिग्ध मौत के मामले में एफआईआर दर्ज किए बिना जांच करने पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीज़न बेंच ने इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए नरसिंहपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है। बेंच ने एसपी को यह बताने कहा है कि“जब संज्ञेय अपराध की सूचना थी, तो बिना FIR जांच कैसे शुरू कर दी गई?” मामले की अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी

भाई की संदिघ्ध मौत से जुड़ा है मामला?

यह मामला जबलपुर के मिशन कंपाउंड में रहने वाले कसीसमुद्दीन कुरैशी ने अपने भाई की संदिग्ध मृत्यु को चुनौती देकर दाखिल किया है। कसैमुद्दीन का दावा है कि नरसिंहपुर में रहने वाले उसके भाई गयासुद्दीन कुरैशी की हत्या हुई है। सबूत के तौर पर उसने अपने भाई के मेडिकल डिस्चार्ज की रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल की है, जिसमे उसके (मृतक भाई के) सीने पर चोट के निशान का जिक्र है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके हत्या के संदेह में FIR दर्ज करने,  दफन की गई लाश के फिर से पोस्टमार्टम और पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराने के लिए  हाई लेवल टीम गठित करने की मांग हाईकोर्ट से की है। इस मामले को लेकर दायर की गई याचिका एकल पीठ द्वारा बिना राज्य से जवाब मांगे खारिज करने के खिलाफ यह रिट अपील दायर की गई।

सरकार बोली- FIR दर्ज करने का मामला नहीं बनता 

याचिकाकर्ता की और से अधिवक्ता अभिनव उमाशंकर तिवारी ने दलीलें रखीं। वहीं राज्य की ओर से पेश जवाब में कहा गया कि पुलिस ने प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) की, कई लोगों के बयान लिए। उस आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि FIR दर्ज करने का मामला नहीं बनता। सरकारी वकील ने डिवीज़न बेंच को बताया कि जांच एसपी के आदेश और पूर्व न्यायालयीन निर्देशों के तहत की गई।

बयान पर कोर्ट ने जताई नाराज़गी

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि  “यदि संज्ञेय अपराध की सूचना थी, तो बिना FIR जांच करना कानून के खिलाफ है।” कोर्ट ने सवाल उठाकर कहा कि 

- बिना FIR पुलिस ने जांच कैसे शुरू कर दी? 

- क्या एसपी के आदेश से कानून बदला जा सकता है?

- क्या कोर्ट के आदेश से भी FIR के बिना जांच संभव है?

अदालत ने इसे कानूनी प्रावधानों की अनदेखी माना।

पुलिस ने ललिता कुमारी केस की अनदेखी की: कोर्ट 

डिवीज़न बेंच ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ललिता कुमारी विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकार केस का उल्लेख किया। सुको ने इस फैसले में कहा है कि संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज करना अनिवार्य है। पुलिस FIR दर्ज किए बिना जांच नहीं कर सकती। प्रारंभिक जांच केवल सीमित मामलों में ही संभव है। हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि पुलिस ने इस बाध्यकारी कानून का उल्लंघन किया है।

एसपी से मांगा गया व्यक्तिगत जवाब

मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि नरसिंहपुर के एसपी व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करके बताएं कि बिना FIR, इस मामले की जांच किस आधार पर की गई? अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि एसपी अपने हलफनामे में क्या जवाब देते हैं और क्या इस मामले में आगे क्या होगा।


हाईकोर्ट का आदेश देखें    WA-371-2026

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