मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बस मालिक संगठन की याचिका खारिज की
इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को स्टेज कैरिज परमिट न देने से जुड़े नियम को वैध ठहराते हुए बस मालिकों के संगठन की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विअज्य कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने कहा है कि राज्य सरकार को परिवहन व्यवस्था की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए परमिट जारी करते समय वाहन की अधिकतम आयु तय करने का अधिकार है।
निमाड़ बस ओनर एसोसिएशन के अध्यक्ष वैभव सिंह तोमर की ओर से दायर याचिका में इंदौर आरटीए द्वारा 7 नवंबर 2025 को जारी उस परिपत्र को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत एमपी मोटर व्हीकल रूल्स, 1994 के नियम 77(1-A) का उपखण्ड 3 बनाया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस नियम के तहत 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को किसी भी रूट पर स्टेज कैरिज परमिट नहीं दिया जाता, जबकि वाहन की आयु तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है। उन्होंने तर्क दिया कि मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 41 और 59 के अनुसार वाहन के रजिस्ट्रेशन की अवधि और उसकी आयु निर्धारित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, इसलिए राज्य सरकार द्वारा बनाया गया नियम अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी और शासकीय अधिवक्ता प्रद्युम्न किबे की दलील थी कि यह नियम वर्ष 2010 में अधिसूचित किया गया था और 2015 में संशोधन कर परिवहन वाहनों की अधिकतम आयु 20 वर्ष से घटाकर 15 वर्ष कर दी गई थी। इस मुद्दे पर पहले भी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच शहीद खान विरुद्ध राज्य सरकार और त्रिपाठी ट्रेवल्स बनाम राज्य शासन के मामलों में स्पष्ट कर चुकी है कि परमिट जारी करते समय राज्य सरकार वाहन की आयु की शर्त निर्धारित कर सकती है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वाहन के रजिस्ट्रेशन की वैधता तय करना और परमिट जारी करते समय वाहन की आयु की शर्त लगाना दो अलग-अलग विषय हैं। इसलिए राज्य सरकार द्वारा परमिट के लिए 15 वर्ष की आयु सीमा तय करना कानून के दायरे में है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब परमिट में ही वाहन की आयु से जुड़ी शर्त शामिल है, तो वाहन मालिक वैध परमिट के बिना वाहन नहीं चला सकते, भले ही रजिस्ट्रेशन अभी वैध क्यों न हो। इन्हीं कारणों के आधार पर हाईकोर्ट ने नियम 77(1-A)(iii) को वैध (intra vires) ठहराते हुए 7 नवंबर 2025 के आदेश और 14 नवंबर 2025 के सर्कुलर को भी सही माना और बस मालिकों की याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-47352-2025
