LAW'S VERDICT

सिंघार की याचिका में आया ट्विस्ट, अभी भी कांग्रेस में ही हैं निर्मला सप्रे

मप्र हाईकोर्ट ने सिंघार को 9 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के सामने पक्ष रखने कहा, ताकि वो फैसला ले सकें 

जबलपुर। सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे की अयोग्यता से जुड़े मामले में ट्विस्ट आया है। एक तरफ जहाँ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सप्रे पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन करने का आरोप लगाकर दल-बदल क़ानून के तहत कार्रवाई की मांग की थी, वहीं सप्रे ने हाईकोर्ट में दावा किया है कि वो अभी भी कांग्रेस में ही हैं। बहरहाल, चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने उमंग सिंघार को कहा है कि वे विधान सभा अध्यक्ष के सामने अपना पक्ष रखें, ताकि उनकी ओर से दाखिल मामले पर फैसला आ सके। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की है। 

सप्रे पर लगा है दल-बदल का आरोप 

मामला तब शुरू हुआ जब बीना से कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीतने वाली विधायक निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने का आरोप लगा। इस आधार पर जून 2024 में विधानसभा अध्यक्ष को उनकी अयोग्यता को लेकर आवेदन दिया गया था। याचिकाकर्ता उमंग सिंघार का कहना है कि दल-बदल कानून को लेकर उनके द्वारा दिए गए आवेदन पर स्पीकर को 90 दिनों के भीतर फैसला लेना था, लेकिन करीब दो साल बाद भी कोई निर्णय नहीं हुआ है। 

कोर्ट में हुई तीखी बहस

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने कहा कि स्पीकर समयसीमा का पालन नहीं कर रहे हैं  वहीं सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि सिंघार खुद बार-बार समय लेते रहे हैं, इसलिए फैसला लंबित है।  वहीं  बेंच के पूछने पर वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने बेंच को बताया की उनकी मुवक्किल निर्मला सप्रे अभी भी कांग्रेस में ही हैं।  

सभी पक्षों की दलीलें सुनकर डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता उमंग सिंघार को निर्देश दिया कि वे 9 अप्रैल को स्पीकर के सामने अपना पक्ष रखें। साथ ही यह भी कहा कि इसके बाद स्पीकर इस पर विचार कर फैसला लें। 

20 की अगली सुनवाई 

मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की गई है। तब तक यह स्पष्ट हो सकता है कि स्पीकर इस पर क्या रुख अपनाते हैं। 

अहम सवाल

मंगलवार को मामले पर आये ट्विस्ट के बाद अब सिंघार की याचिका को लेकर कई अहम सवाल उठ रहे हैं: 
  • क्या स्पीकर तय समयसीमा में फैसला देंगे?
  • क्या राजनीतिक दल बदल का मामला अयोग्यता में बदलेगा?
  • या प्रक्रिया में देरी आगे भी जारी रहेगी?

अब यह मामला अब केवल एक विधायक की अयोग्यता तक सीमित नहीं, बल्कि विधानसभा स्पीकर की संवैधानिक जिम्मेदारी और समयसीमा पालन पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

Post a Comment

Previous Post Next Post