डोमिसाइल की टाइपिंग गलती पर रोका चयन, हाईकोर्ट ने कहा- नियुक्ति प्रक्रिया मेरिट के आधार पर पूरी करने का आदेश
इंदौर। एक मेधावी अभ्यर्थी के करियर पर सिर्फ एक तकनीकी गलती के कारण लगी रोक को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अन्यायपूर्ण ठहराते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ एक टाइपिंग मिस्टेक के आधार पर किसी योग्य उम्मीदवार का भविष्य बर्बाद नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 16 नवंबर 2020 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके जरिए अभ्यर्थी की उम्मीदवारी खारिज कर दी गई थी।
कांस्टेबल भर्ती से जुड़ा है मामला
मामला Constable (GD) भर्ती परीक्षा 2018 का है, जो Staff Selection Commission (SSC) द्वारा आयोजित की गई थी। याचिकाकर्ता रोहित गामी ने 15 सितंबर 2018 को एमपी ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन किया था। आवेदन भरते समय एक गंभीर लेकिन अनजाने में हुई तकनीकी गलती हो गई।उसने डोमिसाइल जिले के कॉलम में खरगोन (West Nimar) चुन लिया, जबकि वास्तविक डोमिसाइल कालापीपल, जिला शाजापुर था। महत्वपूर्ण बात यह थी कि उसी फॉर्म में दिए गए स्थायी और डाक पते में सही पता (शाजापुर) दर्ज था।
सेवेर धीमा होने से हुई गलती
याचिकाकर्ता के अनुसार फॉर्म कियोस्क ऑपरेटर द्वारा भरा गया। उस दौरान सर्वर बेहद धीमा था और ड्रॉपडाउन से गलत जिला चुन लिया गया। खुद SSC ने भी उस समय सर्वर स्लो होने की बात नोटिस में स्वीकार की थी और उम्मीदवारों को ऑफ-पीक टाइम में फॉर्म भरने की सलाह दी थी।
हर चरण में शानदार प्रदर्शन
इस तकनीकी गलती के बावजूद अभ्यर्थी ने हर स्तर पर खुद को साबित किया
- लिखित परीक्षा (18 फरवरी 2019): 90% अंक
- कट-ऑफ: 73.8%
- PST/PET: सफल
- मेडिकल (DME): उपस्थित
29 जनवरी 2020 को दस्तावेज सत्यापन के दौरान उसने शाजापुर का मूल डोमिसाइल प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया।
फिर भी खारिज हुई उम्मीदवारी
सिर्फ एक कारण ऑनलाइन फॉर्म के कॉलम 17 में दर्ज जिला और वास्तविक डोमिसाइल में अंतर होने को आधार बनाकर अधिकारियों ने प्रमाण पत्र स्वीकार करने से इनकार किया। 31 जनवरी 2020 को पहली बार रिजेक्शन और बाद में 16 नवंबर 2020 को अंतिम रूप से उम्मीदवारी खारिज की गई।
अनजाने में हुई मामूली गलती: कोर्ट
कोर्ट ने पूरे मामले का गहराई से विश्लेषण करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता से यह सिर्फ एक मामूली और अनजाने में हुई गलती थी। इसका चयन की मेरिट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अभ्यर्थी ने हर चरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और आवेदन फॉर्म में अन्य जगह सही पता दर्ज था। कोर्ट ने इसे “hyper-technical ground” बताते हुए खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने 16 नवंबर 2020 का आदेश रद्द करके याचिकाकर्ता काडोमिसाइल कालापीपल, जिला शाजापुर मानने का निर्देश दिया। साथ ही मूल प्रमाण पत्र को वैध मानने और अभ्यर्थी की नियुक्ति प्रक्रिया मेरिट के आधार पर पूरी करने का आदेश दिया। यह पूरी प्रक्रिया 60 दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें W.P. No. 19419/2020
