मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव विवाद: अब स्टेट बार ने माँगा BCI से मार्गदर्शन
जबलपुर। 25 सदस्यीय नई कार्यकारिणी के चुनाव से पहले मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल में चल रहा चुनाव अधिकारी नियुक्ति विवाद और गहरा गया है। दो अलग-अलग चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति से उपजे गतिरोध पर जस्टिस धूलिया की कमेटी ने स्पष्ट कर दिया है कि रिटायर्ड जस्टिस एसके पालो ही चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराएंगे।
कमेटी के इस रुख के बाद अब स्टेट बार काउंसिल ने मामले में अंतिम स्पष्टता के लिए Bar Council of India (बीसीआई) से मार्गदर्शन मांगा है। जानकारी के अनुसार बीसीआई ने इस मुद्दे को लेकर आपात बैठक बुलाई है, जिसमें आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट ने दी है 30 अप्रैल की डेडलाइन
गौरतलब है कि Supreme Court of India ने मप्र स्टेट बार कॉउंसिल के चुनाव की डेड लाइन 30 अप्रैल तय की है।16 फरवरी 2026 को रिटायर्ड जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की अध्यक्षता में हाई पावर इलेक्शन कमेटी गठित कर मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल के चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस केके त्रिवेदी और वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ को भी सदस्य बनाया गया था। इसी बीच 21 फरवरी 2026 को बीसीआई ने रिटायर्ड जस्टिस एनके मोदी को चुनाव अधिकारी नियुक्त कर चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया। यह स्थिति तब उजागर हुई जब जस्टिस दिवाकर की कमेटी चार्ज लेने स्टेट बार काउंसिल कार्यालय पहुंची।
दो चुनाव अधिकारी, बढ़ा टकराव
जस्टिस दिवाकर की कमेटी ने जस्टिस एनके मोदी की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए रिटायर्ड जस्टिस एसके पालो को चुनाव अधिकारी नियुक्त कर दिया। दो-दो चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति से विवाद गहरा गया और मामला जस्टिस धूलिया के समक्ष भेजा गया। सूत्रों के मुताबिक, बुधवार शाम जस्टिस धूलिया की कमेटी ने जस्टिस दिवाकर की कमेटी के निर्णय को सही ठहराते हुए जस्टिस एसके पालो की नियुक्ति को मंजूरी दे दी।
बीसीआई से मार्गदर्शन की प्रतीक्षा
पता चला है कि जस्टिस धूलिया का रुख स्पष्ट होने के बाद मप्र स्टेट बार काउंसिल ने बीसीआई को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है। उम्मीद की जा रही है कि गुरुवार को बीसीआई का रुख स्पष्ट होने के बाद सभी अटकलों पर विराम लग जाएगा।
