LAW'S VERDICT

बांग्लादेशी युवती की रिहाई से हाईकोर्ट ने किया इंकार

जमानत मिलने के बाद भी डिटेंशन सेंटर में रखे जाने के खिलाफ लगाई थी हाईकोर्ट में याचिका 

इंदौर।  मप्र उच्च न्यायालय ने बिना पासपोर्ट और वीजा के इंदौर से गिरफ्तार हुई एक बांग्लादेशी युवती को रिहा करने के निर्देश देने से इंकार कर दिया है। एक अपहरण के मामले में इंदौर पुलिस ने युवती को गिरफ्तार किया था। युवती का कहना था कि हाईकोर्ट से 9 जुलाई 2022 को जमानत मिलने के बाद भी उसे डिटेंशन सेंटर में रखा गया है, जो उसके अधिकारों का उल्लंघन है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने कहा है कि निचली अदालत में चल रहे ट्रायल में उसकी जरूरत पड़ सकती है। मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य का हवाला देकर बेंच ने कहा कि युवती को फिलहाल डिटेंशन सेंटर में रखा जाना उचित है। हालाँकि, बेंच ने यह जरूर कहा कि यदि इस अवधि में भी ट्रायल पूरा नहीं होता, तो याचिकाकर्ता  पुनः याचिका दायर करने की स्वतंत्रत रहेगी। इन निर्देशों के साथ डिवीज़न बेंच ने युवती की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण कर दिया।  

अपहरण के मामले में हुई थी गिरफ्तारी 

बांग्लादेश के खुलना राज्य के बागेहाट में रहने वाली लीमा उर्फ़ रिया शेख को इंदौर के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र से 6 फरवरी 2020 को हिरासत में लिया गया था। दरअसल, अनिल पाल का अपहरण 2 लाख रूपए की फिरौती के लिए किया गया था। पुलिस ने दत्त नगर के एक मकान में छापा मारकर अनिल पाल को बरामद किया था। वहाँ पर आरोपी लीमा उर्फ़ रिया शेख सहित कुल 4 आरोपी पकडे गए थे। पुलिस ने पाया था कि लीमा उर्फ़ लिया शेख बिना पासपोर्ट और वीजा के हिन्दुस्तान में रह रही थी।  

हाईकोर्ट से मिली जमानत, फिर भी रिहाई नहीं 

युवती लीमा उर्फ़ रिया शेख ने हाईकोर्ट में दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में आरोप लगाया था कि जिस आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया,  उसमें उसे 25 जुलाई 2022  को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच से जमानत मिल गई है। इसके बाद भी उसे रिहा नहीं किया जा रहा, जो उसके अधिकारों का उल्लंघन है। इस अवैध हिरासत की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की प्रार्थना युवती ने हाईकोर्ट से की थी। 

गंभीर धाराओं में दर्ज है अपराध

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सोनल गुप्ता ने डिवीज़न बेंच को बताया कि याचिकाकर्ता लीमा और रिया शेख वर्ष 2020 में दर्ज हुए अपहरण के मामले में आरोपी है। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 346, 347, 323, 364-ए, 506, 34 तथा विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धाराएं 14 (a), 14 (b), 14 (c) के तहत मामला दर्ज है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता बांग्लादेश की नागरिक है, इसीलिए उसको  जिला दंडाधिकारी, इंदौर के विधिवत आदेश के तहत डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। 

6 माह में ट्रायल पूरा करने का निर्देश

सुनवाई के बाद दिए फैसले में डिवीज़न बेंच ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता जेल में नहीं, बल्कि डिटेंशन सेंटर में है, इसलिए तत्काल रिहाई का आदेश देना उचित नहीं होगा। अदालत ने माना कि ट्रायल अभी भी लंबित है और किसी भी समय आरोपी की उपस्थिति आवश्यक हो सकती है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए उसकी सुरक्षा के लिए डिटेंशन सेंटर में रखना उपयुक्त है। हालांकि, यह भी स्वीकार किया गया कि मामला छह वर्ष से अधिक समय से लंबित है। इस पर कोर्ट ने राज्य के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि प्रमाणित प्रति प्राप्त होने से छह माह के भीतर गवाहों की पेशी सुनिश्चित कर ट्रायल को तेज किया जाए।

हाईकोर्ट का आदेश देखें  WP-5831-2026

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