एक युवती ने मदन महल पुलिस पर लगाए हैं गांजे के झूठे मामले में फंसाने के आरोप
जबलपुर। मदन महल थाना पुलिस द्वारा एक युवती को गांजा मामले में कथित रूप से झूठा फंसाने के आरोपों पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच के लिए 4 सप्ताह का अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग ठुकराते हुए जस्टिस संदीप एन भट्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि अदालत को पुलिस के बहाने नहीं, बल्कि सच्चाई चाहिए। कोर्ट ने जबलपुर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को निर्देश दिया है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए निष्पक्ष जांच कर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अगली सुनवाई 27 फरवरी को तय की गई है।
सवा 12 किलो गांजे के साथ गिरफ्तारी, पर उठे गंभीर सवाल
मामला 11 जनवरी 2026 का है। जबलपुर निवासी एक युवती को मदनमहल थाना पुलिस ने लिंक रोड पर सवा 12 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार किया था। युवती ने जमानत याचिका दायर करते हुए दावा किया कि वह रायपुर से जबलपुर ट्रेन से आ रही थी, तभी मदन महल थाने के एक पुलिस अधिकारी ने उससे छेड़छाड़ की। विरोध करने पर उसे जबरन थाने ले जाकर फर्जी एनडीपीएस केस में फंसा दिया गया।
जमानत से इनकार, पर आरोपों को माना गंभीर
हाईकोर्ट ने फिलहाल युवती को जमानत देने से इनकार कर दिया, लेकिन उसके आरोपों को गंभीर मानते हुए पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए। अदालत ने आईजी से कहा था कि वे बिना किसी भेदभाव के तथ्यों की पड़ताल कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें।
सरकार ने मांगा चार सप्ताह का समय, कोर्ट नाराज
आगे की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए शुक्रवार तक का समय दिया और स्पष्ट किया कि रिपोर्ट हर हाल में पेश की जाए। युवती की ओर से अधिवक्ता सौरभ कुमार शर्मा और विकास कुमार संटू पैरवी कर रहे हैं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें MCRC-4158-2026
