फर्जी तामीली दर्शाकर कोर्ट को गुमराह करने का लगा है आरोप
जबलपुर। न्यायिक अभिलेखों में कथित जालसाजी और फर्जी तामीली दर्शाकर अदालत को गुमराह करने के गंभीर आरोपों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने ओमती थाना प्रभारी राजपाल सिंह बघेल और एएसआई भल्लूराम चौधरी को 8 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
रजिस्ट्रार के नाम से फर्जी लिफाफा तैयार करने का आरोप
मामला जबलपुर निवासी वीरेंद्र पाण्डेय की याचिका से जुड़ा है, जो स्वयं हाईकोर्ट में कर्मचारी हैं। याचिका के अनुसार, उनकी शिकायत पर दर्ज एफआईआर को उनके वैवाहिक संबंधियों ने रिवीजन में चुनौती दी। आरोप है कि इस दौरान रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय के नाम से फर्जी लिफाफा और नोटिस तैयार कर विभाग के माध्यम से तामीली दर्शाई गई, जिसके आधार पर सत्र न्यायालय ने एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया।
प्रारंभिक जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि
रजिस्ट्रार जनरल को शिकायत दिए जाने के बाद जिला न्यायाधीश (चतुर्थ) की प्रारंभिक जांच में कथित फर्जीवाड़े की पुष्टि होने का उल्लेख किया गया। इसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति दी, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। आखिरकार न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी ने 12 जुलाई 2025 को ओमती थाने को मामला दर्ज करने का आदेश दिया। आदेश 13 अगस्त 2025 को थाने पहुंचने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। अवमानना याचिका दाखिल होने के बाद 24 सितंबर 2025 को एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस की कार्यवाही पर कोर्ट की नाराजगी
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि ओमती पुलिस ने एफआईआर अत्यंत शीघ्रता और दुर्भावनापूर्ण ढंग से दर्ज की। इसी दौरान आरोपियों को अग्रिम जमानत भी मिल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है और निजी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, विनीट टेहेनगुरिया, प्रशांत सिरमोलिया और शुभम पाटकर ने पैरवी कर रहे हैं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-49510-2025
