जबलपुर। सिहोरा में मंदिर पर पथराव और दंगा करने के बहुचर्चित प्रकरण में गिरफ्तार 49 आरोपियों को जिला सत्र न्यायालय से राहत नहीं मिली। न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी अजय उइके की अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर जमानत देने से गवाहों को प्रभावित करने और साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में जमानत देना न्यायोचित नहीं है।
आरती के दौरान पहुंची भीड़, मंदिर पर पथराव
घटना 19 फरवरी 2026 की रात करीब 9:30 बजे की बताई गई है। सिहोरा के आजाद चौक स्थित जय ज्योति समिति में माता जी की आरती चल रही थी। आरोप है कि इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे और आरती कर रहे लोगों से गाली-गलौज व मारपीट की।
कुछ देर बाद विवाद शांत होने पर भीड़ दोबारा ईंट-पत्थर लेकर लौटी और मंदिर की ओर पथराव शुरू कर दिया। आरोप है कि मंदिर के सामने लगी स्टील रेलिंग तोड़ी गई और देवी-देवताओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार किया गया, जिससे उपस्थित लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। पथराव में कुछ लोग घायल हुए और मंदिर को नुकसान पहुंचा।
पुलिस ने 49 आरोपियों को किया गिरफ्तार
सिहोरा थाना पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर 49 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 20 फरवरी को सभी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद सभी आरोपियों की ओर से जमानत के लिए अलग-अलग अर्जियां प्रस्तुत की गईं।
अभियोजन का कड़ा विरोध
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीपीओ अजय दुबे ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि घटना पूर्व नियोजित प्रतीत होती है। यदि आरोपियों को जमानत दी जाती है तो वे गवाहों को धमका सकते हैं या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। साथ ही, उनकी रिहाई से क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका है।
अदालत ने अभियोजन के तर्कों से सहमति जताते हुए सभी 49 आरोपियों की जमानत अर्जियां निरस्त कर दीं।
