मृतक की 50% लापरवाही साबित, 163-A के तहत मुआवजा नहीं
ग्वालियर। मोटर दुर्घटना से जुड़े एक मामले पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि लापरवाही से बाइक चलाने से यदि कोई एक्सीडेंट हुआ है, तो बाइक चालक मुआवजा पाने का हकदार नहीं होगा। जस्टिस हिरदेश की अदालत ने शिवपुरी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) द्वारा 18 जनवरी 2018 को पारित किये गए अवार्ड को निरस्त करके यह फैसला दिया।
दुर्घटना का घटनाक्रम
8 अगस्त 2016 की सुबह दीपक यादव अपने मित्र सोनू के साथ मोटरसाइकिल से पेट्रोल भराने जा रहे थे। साक्षी मैरिज गार्डन के पास एक ट्रैक्टर से उनकी बाइक टकरा गई। आरोप था कि ट्रैक्टर चालक ने बिना संकेत दिए अचानक ब्रेक लगाया, जिससे पीछे से आ रही बाइक टकरा गई। दोनों घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में ग्वालियर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान बाइक चालक दीपक यादव की मृत्यु हो गई। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट पेश की।
ट्रिब्यूनल ने माना— दोनों की 50-50% लापरवाही
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, शिवपुरी ने साक्ष्यों के आधार पर माना कि दुर्घटना मृतक और ट्रैक्टर चालक दोनों की 50-50% लापरवाही से हुई। इसी आधार पर दावेदारों को मुआवजा प्रदान किया गया। हालांकि, इस फैसले को दावेदारों की ओर से चुनौती नहीं दी गई, जिससे यह अंतिम (final) हो गया।
हाईकोर्ट ने की कानूनी व्याख्या
ट्रेक्टर मालिक देवेंद्र सिंह व चालक की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा धाकड़ ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि दावा धारा 163-A के तहत दायर किया गया था। इस प्रावधान में यदि यह स्थापित हो जाए कि मृतक स्वयं दुर्घटना के लिए लापरवाह था, तो मुआवजा नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के आलोक में माना कि धारा 163-A पूर्णतः ‘नो फॉल्ट’ सिद्धांत पर आधारित नहीं है। यदि रिकॉर्ड से मृतक की लापरवाही सिद्ध हो जाए और प्रतिपक्ष उसे साबित कर दे, तो दावा अस्वीकार किया जा सकता है।
ट्रेक्टर चालक के बयान बने निर्णायक
इस मामले पर दिए फैसले में जस्टिस हिरदेश ने अधिकरण में दर्ज किये गए ट्रेक्टर चालक के बयान का उल्लेख किया। ड्राइवर का कहना था कि उसे पता नहीं था कि पीछे से कोई आ रहा है। चूंकि रास्ते पर गाय आ गई, इसलिए उसने ट्रेक्टर को रोककर गाय को हटाने लगा। यदि बाइक चालक सावधानी से बाइक चला रहा होता तो वह ट्रेक्टर से नहीं टकराता। ट्रिब्यूनल ने ट्रेक्टर और बाइक चालकों की आधी-आधी गलती मानकर हादसे के लिए दोनों को जिम्मेदार माना था।
ट्रिब्यूनल का पुरस्कार निरस्त
हाईकोर्ट ने कहा- चूंकि ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट और अप्रतिवादित रूप से मृतक को 50% सहदोषी (contributory negligent) ठहराया था, इसलिए उसके विधिक उत्तराधिकारी धारा 163-A के तहत मुआवजा पाने के पात्र नहीं हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए 18 जनवरी 2018 का एमएसीटी, शिवपुरी का पुरस्कार निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट का आदेश देखें MA-2085-2018
