LAW'S VERDICT

मूक-बधिर छात्रों का शोषण: हाईकोर्ट ने ITI इंदौर में दोबारा जांच करने कहा

इंदौर। मूक-बधिर विद्यार्थियों के कथित शोषण और कुप्रबंधन को लेकर दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है कि सरकारी अनुवादक उपलब्ध कराकर दोबारा निरीक्षण कराया जाए। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने निरीक्षण की  पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी कर रिपोर्ट पेश करने के भी निर्देश देकर मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की है।

DALSA को पहले जांच के निर्देश

सतीश कुमार लिखारिया की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने 12 जनवरी 2026 को District Legal Services Authority, Indore (DALSA) के सचिव को संस्थान का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। 3 फरवरी को विशेषज्ञ अनुवादक उपलब्ध न होने के कारण रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा सकी और समय मांगा गया। 16 फरवरी को रिपोर्ट पेश हुई, लेकिन वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई स्थगित हो गई।

राज्य का जवाब: इंटरप्रेटर की सेवा समाप्त, सुधार के दावे

इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब में बताया गया कि अतिथि संकाय की इंटरप्रेटर श्रीमती इंदिरा जाटवा की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। मामला संबंधित थाने को जांच के लिए भेजा गया है। सरकार ने दावा किया कि सभी शौचालयों की सफाई और मरम्मत कर उन्हें व्यवस्थित रूप से जोड़ा गया है। स्वच्छता सुनिश्चित की गई है। आरओ सिस्टम और वाटर कूलर की सर्विसिंग की गई और गर्म पानी के लिए गीजर लगाए गए हैं। इस दावे के समर्थन में फोटो भी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किए गए।

दूसरी रिपोर्ट पर सवाल

12 फरवरी को DALSA सचिव ने एक अनुवादक के साथ पुनः निरीक्षण किया और 13 फरवरी को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कहा गया कि अब संस्थान में कोई गंभीर कुप्रबंधन नहीं पाया गया और पूर्व की कमियां दूर कर दी गई हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शन्नो शगुफ्ता खान और प्रतीक माहेश्वरी ने आपत्ति जताई कि निरीक्षण सरकारी अनुवादक के बजाय निजी अनुवादक के आधार पर किया गया। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए सरकारी अनुवादक की उपस्थिति में पुनः निरीक्षण की मांग की। साथ ही, पुलिस को भेजे गए मामले में अब तक कार्रवाई न होने पर भी प्रश्न उठाए।

15 दिन में सरकारी अनुवादक उपलब्ध कराओ: कोर्ट 

कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर मूक-बधिर छात्रों के लिए सरकारी अनुवादक उपलब्ध कराए। अनुवादक की नियुक्ति के 10 दिनों के भीतर DALSA सचिव पुनः निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के दौरान वीडियोग्राफी कर पेन ड्राइव में रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए हैं। 23 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई राज्य सरकार को यह भी बताना होगा कि पुलिस को भेजे गए प्रकरण में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

हाईकोर्ट का आदेश देखें  WP-911-2026

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