6 माह के लिए लेडी कांस्टेबल को बनाया ‘शौर्य दीदी’
ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में श्रवण एवं वाणी बाधित (दिव्यांग) महिला से जुड़ी हैबियस कॉर्पस याचिका का निराकरण करते हुए उसे अपने पति के साथ रहने की अनुमति प्रदान कर दी है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस हिरदेश की डिवीज़न बेंच ने दिव्यांग महिला की मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘शौर्य दीदी’ व्यवस्था लागू करने के निर्देश भी दिए हैं।
यह याचिका पति अशोक द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसकी पत्नी को एक व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान महिला (कॉर्पस) को पुलिस थाना डबरा, जिला ग्वालियर की टीम द्वारा हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया गया। महिला के साथ उसके पिता भी उपस्थित रहे। हाईकोर्ट को बताया गया कि महिला श्रवण और वाणी से दिव्यांग है, इसलिए उसकी मंशा जानने के लिए सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ की सहायता ली गई। विशेषज्ञ के माध्यम से महिला ने स्पष्ट रूप से अपनी इच्छा जाहिर की कि वह अपने पति के साथ वैवाहिक घर में रहना चाहती है।
पति ने दी सहमति
कोर्ट ने पति से भी सीधा सवाल किया, जिस पर पति ने बिना किसी शर्त के पत्नी को पारिवारिक वातावरण में स्वीकार करने की सहमति दी। महिला और पति दोनों की सहमति को देखते हुए कोर्ट ने माना कि याचिका का उद्देश्य पूर्ण हो चुका है और अब कोई विवाद शेष नहीं है। इस मत के साथ कोर्ट ने महिला को स्वतंत्र करते हुए आदेश दिया कि वह अदालत परिसर से अपने पति के साथ जा सकती है।
कांस्टेबल बनी शौर्य दीदी
हालाँकि, महिला की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने लेडी कॉन्स्टेबल मेघा शर्मा को आगामी छह माह तक महिला के लिए ‘शौर्य दीदी’ की भूमिका निभाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि लेडी कॉन्स्टेबल नियमित रूप से महिला से संपर्क करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि वह मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से सुरक्षित रहे। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ‘शौर्य दीदी’ की अवधारणा पूर्व में दिए गए एक निर्णय में विकसित की गई थी, जिसका उद्देश्य पीड़ित महिलाओं और संवेदनशील वर्गों को मार्गदर्शन, संरक्षण और भावनात्मक सहयोग प्रदान करना है।
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