हाईकोर्ट ने श्योपुर कलेक्टर को दिए अतिक्रमणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश
क्या है पूरा मामला
पत्रकार ब्रजेश शर्मा की से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि श्योपुर स्थित सर्वे नंबर 296/1 की शासकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर भूमि को सिंचाई विभाग की बताने की कोशिश की गई, जबकि जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है कि यह भूमि विभाग की नहीं है। याचिका में भूमि की निष्पक्ष सीमांकन (डिमार्केशन), गलत प्रविष्टियों को हटाने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और सहकारी आवास समिति के सदस्यों को बेदखली से संरक्षण देने की मांग की गई थी।
राज्य सरकार की दलील
राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर व अधिवक्ता कार्तिक करारा ने डिवीज़न बेंच को बताया गया कि कलेक्टर, जिला श्योपुर द्वारा पहले ही 23 जून 2025 को एक जांच समिति गठित की जा चुकी है। इस समिति की अध्यक्षता डिप्टी कलेक्टर ने की थी। समिति ने 4 सितंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया गया है। वर्तमान में प्रशासन इन अनियमितताओं को दूर करने की प्रक्रिया में है।
एक माह में कार्रवाई का आदेश
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिवाकर व्यास की दलीलों पर गौर करने के बाद डिवीज़न बेंच ने निर्देश दिया कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक फॉलो-अप कार्रवाई एक माह के भीतर श्योपुर के कलेक्टर द्वारा सुनिश्चित की जाए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और कलेक्टर को कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना होगा।
क्यों अहम है यह आदेश
यह आदेश शासकीय भूमि अतिक्रमण, राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है और भविष्य में ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की राह खोलता है।
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