हाईकोर्ट ने FIR और उसके आधार पर चल रही आपराधिक कार्रवाई रद्द कीं
जबलपुर। फोन पर कथित गाली-गलौज और धमकी देने के आरोपों से जुड़े एक पुराने मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस बीपी शर्मा की अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल फोन कॉल पर अश्लील भाषा का प्रयोग IPC की धारा 294 के दायरे में नहीं आता, क्योंकि यह अपराध सार्वजनिक स्थान पर होना जरूरी है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने FIR और उससे उत्पन्न सभी कार्यवाहियां रद्द कर दीं।
दामाद पर ससुर को गाली देने के थे आरोप
यह याचिका राजस्थान के करौली में रहने वाले दीपक भटनागर व अन्य की और से दायर करके छतरपुर जिले के कोतवाली थाने में 18 जुलाई 2011 को दर्ज FIR को चुनौती दी थी। दरअसल, दीपक के ससुर रामगोपाल भटनागर (छतरपुर) ने आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ताओं ने फ़ोन पर कॉल करके उन्हें गालियां देकर जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने जांच के बाद IPC की धारा 294 और 506-B/34 के तहत FIR दर्ज की थी, जिसके बाद मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के समक्ष विचाराधीन था।
आवेदकों की दलील
आवेदकों के वकील पुनीत श्रोती ने तर्क दिया कि FIR में लगाए गए आरोप धारा 294 IPC के आवश्यक तत्वों को पूरा नहीं करते। फोन कॉल पर कही गई अश्लील भाषा को सार्वजनिक स्थान पर किया गया कृत्य नहीं माना जा सकता। जब धारा 294 लागू ही नहीं होती, तो धारा 506 IPC (गैर-संज्ञेय अपराध) में पुलिस सीधे FIR दर्ज नहीं कर सकती। इस संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तथा केरल हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का भी हवाला दिया गया।
पूरा घटनाक्रम मोबाइल तक सीमित
हाईकोर्ट ने FIR और रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि शिकायत में वर्णित पूरा घटनाक्रम केवल मोबाइल फोन पर हुई बातचीत तक सीमित है। धारा 294 IPC के लिए अपराध का सार्वजनिक स्थान पर होना अनिवार्य है। जब धारा 294 लागू नहीं होती, तो धारा 506 IPC में भी FIR दर्ज करना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। इस मत के साथ अदालत ने कोतवाली थाने में दर्ज FIR और उसके आधार पर की जा रहीं सभी कार्रवाई को निरस्त करके याचिकाकर्ताओं को बरी कर दिया।
हाईकोर्ट का आदेश देखें MCRC-7085-2015
.png)