घोटाले की CBI जांच की मांग, हाईकोर्ट ने सरकार को भेजा नोटिस
जबलपुर। छतरपुर जिले में कथित 30 हजार करोड़ रुपये के ग्रेनाइट खनन घोटाले को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सरकार समेत सभी अनावेदकों को चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
नियमों को दरकिनार कर आवंटन का आरोप
याचिका के मुताबिक 1996 के मध्यप्रदेश लघु खनिज नियम लागू होने से पहले ही 1995 में जमीन का आवंटन निजी कंपनी को कर दिया गया। नियम लागू होने के बाद जब टेंडर प्रक्रिया हुई, तो उच्चतम बोलीदाता को नजरअंदाज कर कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। इस पूरे प्रकरण में राज्य खनन विभाग और मप्र राज्य खनिज निगम की मिलीभगत का आरोप है।
30 हजार करोड़ की वसूली दबाने का दावा
याचिका में कहा गया है कि कंपनी से रॉयल्टी और स्थानीय विकास शुल्क के रूप में करीब 30 हजार करोड़ रुपये की वसूली बनती है, लेकिन षड्यंत्रपूर्वक ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
इतना ही नहीं, वसूली के लिए दो बार समितियां बनीं, पर दोनों को ही डंप कर दिया गया, जिसे अवैधानिक बताया गया है।
सुनवाई के बाद नोटिस जारी
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंकित सक्सेना ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद बेंच ने अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया।
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