प्रदूषण बोर्ड के परिवाद पर संज्ञान लेने की मामले पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
जबलपुर | मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के परिवाद पर कटनी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) द्वारा सीधे संज्ञान लेने के आदेश को खारिज कर दिया है। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पहले कानून को भली-भांति समझा जाए, उसके बाद ही उचित आदेश पारित किए जाएं। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीजन बेंच ने मामले को दोबारा विचार के लिए कटनी के CJM को वापस भेज दिया है।
याचिका उड़ीसा के प्रोजेक्ट हेड ने की थी दायर
यह आदेश बुधवार को उड़ीसा निवासी शांतनु कुमार की याचिका पर पारित किया गया। शांतनु कुमार, कटनी MSW मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड में प्रोजेक्ट हेड के रूप में पदस्थ हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आरोप
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कटनी की जिला सत्र न्यायालय में परिवाद दाखिल कर आरोप लगाया था कि दुगाड़ी नाला के पास करीब 1.5 लाख मीट्रिक टन कचरे का बिना अनुमति भंडारण किया गया है।
CJM ने बिना सुनवाई ले लिया संज्ञान
21 अप्रैल 2025 को तत्कालीन CJM जय प्रताप चिडार ने इस परिवाद पर सीधे संज्ञान लेते हुए प्रकरण दर्ज कर अनावेदकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
हाईकोर्ट का अहम कानूनी निष्कर्ष
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि BNSS, 2023 की धारा 223 के तहत आरोपी को सुनवाई का अवसर दिए बिना उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। लेकिन इस मामले में आरोपियों को सुनवाई का मौका दिए बिना ही संज्ञान लिया गया, जो कानून के स्पष्ट प्रावधानों के खिलाफ है।
आदेश खारिज, मामला फिर CJM को भेजा
हाईकोर्ट ने CJM द्वारा पारित संज्ञान आदेश को निरस्त किया। मामले को पुनः सुनवाई के लिए कटनी CJM के पास भेजा। कानून की मंशा के अनुरूप नया आदेश पारित करने के निर्देश।
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