सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह को शोकॉज नोटिस देने के मामले पर हाईकोर्ट की दो-टूक
जबलपुर | मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर की तीन बार एसोसिएशनों द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह को दिए गए शोकॉज नोटिस के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि कोर्ट परिसर का शांतिपूर्ण माहौल किसी भी कीमत पर बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने बुधवार को सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा “इस कोर्ट का माहौल बेहद शांतिप्रिय है। हम किसी को भी इसे बिगाड़ने की इजाजत नहीं देंगे। आप सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं, यदि कोई विवाद है तो बैठकर आपस में सुलझाइए।” इन टिप्पणियों के साथ डिवीजन बेंच ने मामले पर 17 मार्च को आगे सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा विवाद?
जबलपुर निवासी डॉ. पीजी नाजपाण्डे द्वारा दायर जनहित याचिका में ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति स्थापना से जुड़े विवाद के चलते कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश देने की मांग की गई है। इसी प्रकरण में जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर को कोर्ट परिसर में जातिगत द्वेष फैलाने के आरोप में जबलपुर की तीन बार एसोसिएशनों द्वारा शोकॉज नोटिस जारी किए गए, जिन्हें अदालत की अवमानना बताते हुए एक अलग अर्जी दाखिल की गई थी।
अवमानना की मांग पर कोर्ट का रुख
बुधवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर की ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशनों ने न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया है, इसलिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए। इस पर बेंच ने स्पष्ट किया कि “अगली सुनवाई में हम यह देखेंगे कि अवमानना किसने की है और किसने नहीं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बार एसोसिएशनों ने किस प्रकार के नोटिस जारी किए हैं। यदि नोटिस मिला है तो कानून में उपलब्ध उपाय अपनाइए।”
आपसी समाधान पर जोर
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सलाह दी कि यदि विवाद उत्पन्न हुआ है तो आपसी संवाद और समझौते से उसे सुलझाया जाना चाहिए, ताकि न्यायालय और बार के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे।
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