LAW'S VERDICT

फिर खुलेगा अमरकंटक कन्या आश्रम में 3 छात्राओं की मौत का मामला


जहरीले खाने से हुई थी मौत, आरोपियों की बरी करने के फैसले पर हाईकोर्ट ने सरकार को दी अपील की अनुमति

जबलपुर। अमरकंटक स्थित कन्या आश्रम में भोजन करने के बाद तीन छात्राओं की मौत से जुड़ा 20 साल पुराना मामला फिर खुलेगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस बीपी शर्मा की अदालत नेन्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, राजेन्द्रग्राम (जिला अनूपपुर) द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ  राज्य सरकार को अपील दायर करने की अनुमति (Leave to Appeal) दे दी है। अदालत ने मामले को सम्बंधित बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। 

भोजन के बाद बिगड़ी थी छात्राओं की तबियत 

राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2013 में दाखिल याचिका के अनुसार 6 अप्रैल 2006 को अमरकंटक के कन्या आश्रम में छात्राओं ने शाम का भोजन किया। भोजन के बाद कई छात्राएं उल्टी-दस्त से पीड़ित हो गईं। तीन छात्राओं की हालत गंभीर होने पर मृत्यु हो गई, जबकि 18 अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।

ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी 

इस मामले में क्रिमिनल केस नंबर 179/2007 में ट्रायल कोर्ट ने 6 नवंबर 2012 को अमरकंटक थाना पुलिस द्वारा आरोपी बनाये गए छात्रावास के सहायक शिक्षक उदय सिंह धुर्वे और उसकी पत्नी अनुराधा धुर्वे को IPC की धारा 304-A (लापरवाही से मृत्यु) के आरोप से बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से यह याचिका दाखिल की गई थी।

हाईकोर्ट ने माना भोजन में जहर था 

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि मृतक छात्राओं के विसरा और उल्टी में कीटनाशक ‘Began’ की मौजूदगी पाई गई है। इससे यह स्पष्ट रूप से स्थापित होता है कि घटना के दिन भोजन में कीटनाशक (जहर) मिला हुआ था। ट्रायल कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण तथ्य नज़रअंदाज़ कर दिया कि क्या यह कृत्य लापरवाही से मृत्यु (Section 304-A IPC) के दायरे में आता है और क्या वही मौत का प्रत्यक्ष कारण था। कोर्ट के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह माना जा सकता है कि ट्रायल कोर्ट ने तथ्यों और साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया, जिसके कारण आरोपियों को बरी किया गया।

हाईकोर्ट ने स्वीकार की याचिका

अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दायर धारा 378(3) CrPC की याचिका स्वीकार करके अपील दायर करने की अनुमति प्रदान की गई। साथ ही इस मामले को क्रिमिनल अपील के रूप में पंजीबद्ध कर रोस्टर के अनुसार उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश। 
हाईकोर्ट का आदेश देखें  

Post a Comment

Previous Post Next Post