स्टे के बाद भी 4500 छात्रों वाले स्कूल की बेदखली का मामला
जबलपुर। बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह के खिलाफ चल रही अवमानना कार्रवाई पर तब विराम लग गया, जब वे स्वयं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ के समक्ष उपस्थित हुए। मामला 45 सौ छात्रों और 250 कर्मचारियों वाले नेहरू मॉन्टेसरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की बेदखली से जुड़ा था, जिस पर पहले ही हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी थी।जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष कलेक्टर ने स्वीकार किया कि 9 दिसंबर 2025 को पारित बेदखली आदेश भूलवश जारी हो गया था। उन्होंने कहा कि संबंधित अंतरिम आदेश उनके संज्ञान में नहीं था और भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी। कलेक्टर ने बिना शर्त माफी भी मांगी। अदालत ने विवादित आदेश वापस लिए जाने और माफी को स्वीकार करते हुए मामले का निराकरण कर दिया।
आवंटित जमीन पर चल रहा था स्कूल
यह याचिका चिल्ड्रन्स एजुकेशन सोसायटी और नेहरू मॉन्टेसरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि स्कूल को जमीन बुरहानपुर ताप्ती मिल द्वारा आवंटित की गई थी। बाद में मिल के बीमारू घोषित होने और राष्ट्रीयकरण के बाद वह केंद्र सरकार के अधीन आ गई, लेकिन स्कूल का संचालन वहीं जारी रहा। प्रशासन द्वारा ताप्ती मिल के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने 28 जनवरी 2024 को रोक लगा दी थी। इसके बावजूद 9 दिसंबर 2025 को कलेक्टर ने स्कूल की बेदखली का आदेश पारित कर दिया, जिसे चुनौती देते हुए यह याचिका दाखिल की गई।
नोटिस के बाद सीधे दिया जवाब
17 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। इसके बाद कलेक्टर ने 20 फरवरी को सीधे हाईकोर्ट के डिप्टी रजिस्ट्रार को जवाब भेजते हुए कहा कि अंतरिम आदेश की जानकारी के अभाव में आदेश पारित हो गया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। अदालत ने कलेक्टर की व्यक्तिगत उपस्थिति, आदेश वापसी और बिना शर्त माफी को ध्यान में रखते हुए प्रकरण समाप्त कर दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे पवार व अधिवक्ता चिरंजीव शर्मा ने पैरवी की।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-3834-2026
