कोर्ट ने अंतरिम राहत ठुकराई, अब 4 सप्ताह बाद होगी सुनवाई
क्या है विवाद
नियम 6(8) के अनुसार प्रारंभिक (स्क्रीनिंग) परीक्षा में कटऑफ अंक केवल अनारक्षित, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) जैसे वर्टिकल श्रेणियों के लिए घोषित किए जाएंगे। स्पष्ट रूप से यह भी प्रावधान है कि विभागीय उम्मीदवार और भूतपूर्व सैनिक (Ex-servicemen) जैसे क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण श्रेणियों के लिए अलग से कोई कटऑफ निर्धारित नहीं किया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं राहुल गुर्जर व अन्य के अधिवक्ता भावेश तिवारी ने तर्क दिया कि यदि वर्टिकल श्रेणियों के लिए अलग-अलग कटऑफ निर्धारित किए जाते हैं, तो क्षैतिज आरक्षण श्रेणियों के लिए भी अलग कटऑफ तय होना चाहिए। उनका कहना था कि अलग कटऑफ न देना समानता के अधिकार का उल्लंघन है और संबंधित नियम असंवैधानिक है। हालांकि सुनवाई के दौरान वे ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसमें क्षैतिज श्रेणियों के लिए पृथक कटऑफ अनिवार्य किया गया हो। सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रद्युम्न किबे ने दलीलें रखीं।
दिल्ली पुलिस भर्ती का हवाला
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि Delhi Police की सब-इंस्पेक्टर भर्ती में प्रारंभिक परीक्षा में क्षैतिज श्रेणियों के लिए अलग कटऑफ तय किए गए थे। हालांकि, उस भर्ती के नियमों की प्रति या प्रासंगिक प्रावधान अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए।
हॉरिजॉन्टल आरक्षण कट क्रॉस करता है: कोर्ट
प्रारम्भिक सुनवाई के बाद डिवीज़न बेंच ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि यह स्थापित विधि है कि क्षैतिज आरक्षण, वर्टिकल आरक्षण को “क्रॉस-कट” करता है। अर्थात, किसी भी क्षैतिज श्रेणी के उम्मीदवार को पहले अपनी मूल वर्टिकल श्रेणी का कटऑफ अंक प्राप्त करना होता है। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षण का उद्देश्य नियुक्ति के स्तर पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, न कि अनिवार्य रूप से प्रत्येक चरण पर अलग कटऑफ तय करना।
अंतरिम राहत से इंकार
दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। फिलहाल अदालत ने किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया है। प्रकरण को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-2136-2026
