जबलपुर। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक हरिओम शर्मा को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। मामला भोपाल मुख्य रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक-6 के पास चल रहे मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान की गई बैरिकेडिंग और उससे उत्पन्न आवागमन की बाधा से जुड़ा है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने 23 फरवरी को महाप्रबंधक की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
क्या है मामला?
याचिकाकर्ता श्रीनिवास अग्रवाल एवं अन्य ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि मेट्रो प्रबंधन ने निर्माण कार्य के बाद भी फेंसिंग और बैरिकेडिंग पूरी तरह नहीं हटाई है। इसके चलते आम लोगों को आवाजाही में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मेट्रो रेल प्रशासन की ओर से अदालत में दाखिल हलफनामे में दावा किया गया था कि बैरिकेडिंग हटा दी गई है और मार्ग सुगम बना दिया गया है।
कलेक्टर की रिपोर्ट में खुलासा
अदालत ने मामले की सत्यता जानने के लिए कलेक्टर भोपाल से स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट मांगी। निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आया कि याचिकाकर्ताओं को मात्र लगभग 3.75 फीट चौड़ा संकरा रास्ता उपलब्ध कराया गया है, जो व्यावहारिक उपयोग के लिए पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि तीनों ओर की बैरिकेडिंग पूरी तरह नहीं हटाई गई है।
हलफनामे की सत्यता पर सवाल
कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट ने मेट्रो प्रशासन द्वारा दायर हलफनामे की सत्यता पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। अदालत ने इसे गंभीर मामला मानते हुए महाप्रबंधक को स्वयं उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब 23 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता पैरवी कर रहे हैं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-49294-2025
