LAW'S VERDICT

इंदौर जल त्रासदी: सब कह रहे 30 मौतें, फिर सरकार की गिनती में 16 कैसे? हाईकोर्ट


सरकारी रिपोर्ट को हाईकोर्ट ने eyewash माना, रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता का जांच आयोग गठित

इंदौर |  भागीरथपुरा (वार्ड-11) में दूषित पेयजल से हुई मौतों और गंभीर बीमारियों के मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने प्रशासनिक दावों को कटघरे में खड़ा करते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस अलोक कुमार अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने कहा कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार “जीवन के अधिकार” का हिस्सा है और यह मामला पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है। दूषित पानी से हुई मौतों के आंकड़ों पर सरकारी रिपोर्ट को आड़े हाथों लेते हुए बेंच ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ मौतें 30 हुई हैं ,  फिर किस आधार पर उन्हें 16 बताया जा रहा है। बेंच ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता का जांच आयोग गठित करके मामले की रिपोर्ट पेश करने कहा है। मामले पर अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी।  

भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों पर प्रभात पाण्डे व अन्य की ओर से कुल 5 मामले हाईकोर्ट में दाखिल किये गए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट उस वक्त और सख्त हो गई जब राज्य सरकार यह तक स्पष्ट नहीं कर पाई कि “Verbal Autopsy” क्या होती है, जबकि उसी के आधार पर मौतों का विश्लेषण किया गया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और वैज्ञानिक आधार के बिना मौतों को कम आंकना अस्वीकार्य है। कोर्ट ने माना कि सीवेज मिलावट, पाइपलाइन लीकेज और प्रशासनिक लापरवाही के प्रथमदृष्टया सबूत मौजूद हैं। ऐसे में सरकारी कमेटी की रिपोर्ट को ‘आईवॉश’ करार देते हुए कोर्ट ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच को जरूरी बताया।

सरकार को आदेश 

डिवीज़न बेंच ने सरकार को कहा है कि 6 जनवरी को दिए गए अंतरिम आदेश के मुताबिक़ हर रोज सप्लाई हो रहे पानी की गुणवत्ता का परीक्षण कराए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित मेडिकल कैंप लगाया जाए। सरकार द्वारा 4 सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट पेश की जाए। 

 जांच आयोग के दायरे में क्या-क्या होगा?

  • सप्लाई किया गया पानी दूषित था या नहीं

  • सीवेज/औद्योगिक कचरा/पाइपलाइन लीकेज की भूमिका

  • वास्तविक मौतों की संख्या

  • बीमारियों की प्रकृति

  • प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही

  • दोषी अधिकारियों की पहचान

  • पीड़ितों को मुआवजा देने के दिशानिर्देश

आयोग को मिले सिविल कोर्ट जैसे अधिकार

  • अधिकारियों को तलब करने का अधिकार

  • सरकारी रिकॉर्ड जब्त करने की शक्ति

  • NABL लैब से पानी की जांच

  • मौके का निरीक्षण

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