LAW'S VERDICT

जबलपुर हाईकोर्ट में होगी उज्जैन के सीवरेज प्रोजेक्ट ठेका विवाद की सुनवाई

टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड की याचिका इंदौर बेंच ने ट्रांसफर की, 500 करोड़ से ज्यादा का है विवाद  

इंदौर |  उज्जैन के 500 करोड़ रुपये से अधिक के सीवरेज ठेके विवाद की सुनवाई अब हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर में होगी। दरअसल चीफ जस्टिस ने गॉइडलाइन बनाई है कि 500 करोड़ रुपये से अधिक के हाई वैल्यू कमर्शियल विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई सिर्फ जबलपुर में ही होगी। गाइडलाइन के मद्देनजर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस अलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने मामले को टॉप प्रायोरिटी पर जबलपुर ट्रांसफर करने के आदेश दिए ,  ताकि उसपर जल्द सुनवाई हो सके। 
टाटा प्रोजेक्ट ने लगाई है याचिका 
यह मामला देश की नामचीन कंपनियों में से एक टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की ओर से दाखिल की गई है। कंपनी को उज्जैन के 509.03 करोड़ का सीवरेज प्रोजेक्ट नवंबर 2017 में मिला था। ठेके की अवधि 31 मार्च 2026 तक की थी। बावजूद इसके उज्जैन नगर निगम ने 19 नवंबर 2025 को न सिर्फ 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया, बल्कि उज्जैन नगर निगम के किसी भी ठेके में शामिल होने से भी बैन कर दिया था। इसी फैसले को चुनौती देकर यह याचिका इंदौर खंडपीठ में दाखिल की गई थी। 

500 करोड़ से ऊपर के मामलों पर चीफ जस्टिस का आदेश लागू

मामले पर हुई सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ और अधिवक्ता राघवेंद्र सिंह रघुवंशी ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान रजिस्ट्री कार्यालय की ओर से कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि मुख्य न्यायाधीश के आदेश के तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के कमर्शियल विवाद, जो इंदौर या ग्वालियर बेंच में लंबित या नए दायर हों, उन्हें मुख्यपीठ जबलपुर में ही सुना जाएगा। डिवीज़न बेंच ने पाया कि इस मामले में अनुबंध की कीमत 500 करोड़ रुपये से अधिक है, इसलिए सुनवाई का अधिकार क्षेत्र जबलपुर पीठ को है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि वर्तमान मामला तथा W.P. No. 3467/2026 दोनों को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि सुनवाई प्रधान पीठ, जबलपुर में हो सके।

टॉप प्रायोरिटी में रखने के निर्देश

इंदौर बेंच के प्रधान रजिस्ट्रार को आदेश दिया गया है कि मामले को शीर्ष प्राथमिकता पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए, क्योंकि एक ओर अंतरिम आदेश पहले से पारित है और दूसरी ओर नई याचिका में बैंक गारंटी के इनवोकेशन को सीधी चुनौती दी गई है।

WP-220-2026


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