सतना शहर के रहवासी इलाके में प्रस्तावित सीएनजी गैस स्टोरेज प्लांट को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) को शुक्रवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ नए सिरे से याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की है।
यह आदेश जस्टिस डीडी बंसल और जस्टिस राजेन्द्र कुमार वाणी की खंडपीठ ने पारित किया। कोर्ट ने माना कि याचिका में आवश्यक और पूर्ण दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए हैं, जिसके कारण मामले के गुण-दोष पर विचार करना संभव नहीं है।
रहवासी इलाके में सीएनजी प्लांट पर उठाए गए थे सवाल
जनहित याचिका सतना के भाजपा जिला उपाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद शैलेन्द्र कुमार दाहिया की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कृपालपुर क्षेत्र में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा सीएनजी गैस स्टोरेज प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जो घनी आबादी वाले क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि प्लांट की स्थापना से क्षेत्र में रहने वाले लोगों की जान-माल को खतरा हो सकता है। इस संबंध में संबंधित प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारियों को शिकायतें दी गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
दस्तावेजों की कमी के चलते याचिका वापस
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन ने पक्ष रखा। दस्तावेजों की कमी को देखते हुए कोर्ट ने याचिका को वापस लेने की अनुमति दी और स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता चाहे तो सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ नई जनहित याचिका दाखिल कर सकता है।
महत्वपूर्ण बिंदु
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सीएनजी स्टोरेज प्लांट रहवासी इलाके में प्रस्तावित
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हाईकोर्ट ने याचिका खारिज नहीं, बल्कि वापस लेने पर निस्तारित की
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नई याचिका दाखिल करने की खुली छूट
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जन सुरक्षा से जुड़ा मामला, आगे फिर आ सकता है कोर्ट के सामने
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