सुको का ये फैसला मप्र स्टेट बार कॉउंसिल चुनाव के बदल देगा समीकरण
नई दिल्ली/जबलपुर। सर्वोच्च न्यायालय ने मप्र स्टेट बार काउंसिल चुनाव से पहले बार कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI ) को नियमों में बदलाव करने के आदेश दिए हैं। BCI ने नियम बनाया था कि किसी भी बार एसोसिएशन के पदाधिकारी कॉउंसिल का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने इस नियम को अनुचित ठहराते हुए उसमे बदलाव करने कहा है। स्टेट बार कॉउंसिल के होने वाले चुनावों पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का व्यापक असर होगा और ये फैसला चुनाव की राजनीति के सभी समीकरण बदल देगा।
जबलपुर बार के पदाधिकारियों ने लगाईं थी याचिका
कृत्रिम भेदभाव पर कोर्ट की आपत्ति
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि BCI द्वारा इस संबंधित नियम के जरिए हाईकोर्ट, जिला न्यायालय, उप-मंडलीय न्यायालय की बार एसोसिएशनों के पदाधिकारियों और अन्य अधिवक्ताओं के बीच कृत्रिम भेदभाव किया गया है। कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि कोई अधिवक्ता बार एसोसिएशन का निर्वाचित पदाधिकारी है, उसे राज्य बार काउंसिल चुनाव लड़ने से रोकना लोकतांत्रिक सिद्धांतों और प्रतिनिधित्व के अधिकार के विपरीत है।
एक सप्ताह में संशोधन के निर्देश
शीर्ष अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश दिया है कि वह संबंधित प्रावधान पर एक सप्ताह के भीतर पुनर्विचार कर आवश्यक संशोधन करे। इसके साथ ही याचिका का निस्तारण कर दिया गया तथा लंबित सभी आवेदनों को भी समाप्त माना गया।
अधिवक्ता समुदाय के लिए राहत
इस आदेश को अधिवक्ता समुदाय के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के चुनावी अधिकारों को मजबूती मिलेगी और प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया अधिक समावेशी बनेगी। यह निर्णय न केवल चुनावी अधिकारों की रक्षा की दिशा में अहम है, बल्कि वकालत पेशे में लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला भी माना जा रहा है।
सर्वोच्च न्यायलय का आदेश देखें Writ Petition(s)(Civil) No(s).226/2026
