जिला अदालतों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट की दो टूक, सरकार को बाउण्ड्रीवॉल और पुख्ता पुलिस बंदोबस्त के निर्देश
जबलपुर। प्रदेश की निचली अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियां सामने आने पर Madhya Pradesh High Court ने मंगलवार को कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- “न्यायपालिका के साथ ही सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। क्यों न राज्य के सभी आईएएस अफसरों के यहां तैनात सुरक्षा कर्मियों को वापस लेकर अदालतों की सुरक्षा में लगा दिया जाए?” बेंच ने सरकार को निर्देश दिया कि कम से कम जिला और तहसील अदालतों में उचित ऊंचाई की बाउण्ड्रीवॉल और पुख्ता पुलिस बंदोबस्त सुनिश्चित किया जाए। इन दो मुद्दों पर कार्रवाई कर 17 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में जवाब पेश करने को कहा गया है।
साल 2016 से चल रही है जनहित याचिका
जजों की सुरक्षा के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की थी।
सरकार द्वारा पेश की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट पर हाईकोर्ट प्रशासन ने आपत्ति जताते हुए उसकी कमियां उजागर कीं। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अधिवक्ता बीएन मिश्रा उपस्थित हुए। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल ने पक्ष रखा।
हाईकोर्ट प्रशासन ने बताईं ये गंभीर कमियां
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार नरेश एम सिंह द्वारा दाखिल जवाब में प्रदेश की निचली अदालतों की सुरक्षा को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए 29 जिला न्यायालयों में चहारदीवारी ही नहीं। 27 तहसील अदालतों में बाउण्ड्रीवॉल की ऊंचाई बेहद कम। केवल 5 जिला कोर्ट परिसरों में हैं पुलिस चौकियां। 5 जिलों में जजों और उनके स्टाफ की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं। वहीं 28 जिलों में जजों और उनके परिवारों की सुरक्षा नाकाफी है।
