अंबेडकर अपमान -
वकील अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट में अब सोमवार को सुनवाई
डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र को जलाने और अपमानजनक नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए वकील अनिल मिश्रा की याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी गई है।
रविवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जी.एस. आहलूवलिया और न्यायमूर्ति आशीष श्रोती की डिवीजन बेंच ने मामले के शिकायतकर्ता मकरंद बौद्ध को पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दे दी।
हाईकोर्ट का निर्देश
हाईकोर्ट ने ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिए हैं कि—
👉 शिकायतकर्ता मकरंद बौद्ध को रविवार दोपहर 2 बजे तक याचिका की प्रति उपलब्ध कराई जाए,
ताकि वे अगली सुनवाई में अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रख सकें।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई सोमवार सुबह 10:30 बजे से होगी।
क्या है पूरा मामला?
1 जनवरी को डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र को जलाने और अपमानजनक नारे लगाने के आरोप में साइबर सेल ने वकील अनिल मिश्रा को गिरफ्तार किया था।
इस गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए अनिल मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें गिरफ्तारी को अवैध बताया गया है।
कौन-कौन रहा पेश?
रविवार को हुई सुनवाई के दौरान अनिल मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे.पी. मिश्रा, अधिवक्ता पवन पाठक, अधिवक्ता ऋषि कुमार कटारे और राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.डी. सिंह, अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेड़कर हाईकोर्ट में उपस्थित रहे।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला न केवल डॉ. अंबेडकर से जुड़े संवेदनशील मुद्दे से जुड़ा है, बल्कि—
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गिरफ्तारी की वैधता
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अभिव्यक्ति की सीमा
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शिकायतकर्ता के पक्षकार बनने के अधिकार
जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और आपराधिक कानून के प्रश्न भी इसमें शामिल हैं।
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