157 लॉ ऑफिसरों वाली महाधिवक्ता की नई टीम पर उठे सवाल, हाईकोर्ट में दाखिल हुई याचिका
मध्यप्रदेश सरकार के वकीलों (Government Advocates) की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कार्यालय महाधिवक्ता के कुल 157 लॉ ऑफिसरों की नियुक्ति के संबंध में 25 दिसंबर को जारी की गई सूची को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अधिवक्ता योगेश सोनी की ओर से सोमवार को दाखिल हुई याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह अपारदर्शी, मनमानी और पक्षपातपूर्ण रही, जिसमें केवल “प्रैक्टिस के वर्षों” को निर्णायक आधार बनाकर कानून और संवैधानिक सिद्धांतों की खुली अनदेखी की गई। इस याचिका पर हाई कोर्ट में जल्द सुनवाई होगी।
जबलपुर के बिलहरी में रहने वाले याचिकाकर्ता अधिवक्ता योगेश सोनी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना में सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट और निर्धारित प्रक्रिया तय की गई है, लेकिन महाधिवक्ता कार्यालय ने उसका स्पष्ट उल्लंघन किया। आवेदन निर्धारित फॉर्म में आमंत्रित तो किए गए, लेकिन यह कहीं भी सार्वजनिक नहीं किया गया कि इन आवेदनों की जांच, मूल्यांकन और शॉर्टलिस्टिंग किस आधार पर की गई।
याचिका में यह भी कहा गया है कि न तो कोई मापदंड जारी किया गया, न अंक प्रणाली, न ही चयन या अस्वीकृति के कारण बताए गए। इससे पूरी प्रक्रिया पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है और यह “कलरेबल एक्सरसाइज ऑफ पावर” का स्पष्ट उदाहरण है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति केवल अनुभव के वर्षों के साथ योग्यता, दक्षता, ईमानदारी और उपयुक्तता के आधार पर होनी चाहिए। मनमाने चयन से न केवल योग्य अधिवक्ताओं के अधिकारों का हनन हुआ है, बल्कि यह अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता के सिद्धांतों का भी उल्लंघन है।
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में जल्द होगी। इस याचिका से सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
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