LAW'S VERDICT

चेक बाउंस केस में ऐतिहासिक फैसला: अब बिना विशेष अनुमति के पीड़ित कर सकेगा अपील


14 साल पुरानी सोम डिस्टलरीस की याचिका पर मप्र हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला  

जबलपुर।  चेक बाउंस (Section 138, Negotiable Instruments Act) मामलों में पीड़ितों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के आलोक में यह स्पष्ट हो गया है कि पीड़ित/शिकायतकर्ता अब आरोपी के बरी होने के खिलाफ बिना किसी विशेष अनुमति (Special Leave) के सीधे अपील कर सकता है।यह अहम टिप्पणी Celestium Financial बनाम ए. ज्ञानसेकरन मामले (2025 SCC OnLine SC 1320) में की गई है, जिसका असर देशभर में लंबित और पुराने चेक बाउंस मामलों पर पड़ेगा। शीर्ष अदालत के इस फैसले के मद्देनजर जस्टिस बीपी शर्मा की अदालत ने सोम डिस्टलरीज कंपनी को 4 माह के भीतर अपील करने की स्वतंत्रता दी है।

 मामला क्या है?

भोपाल की जिला अदालत ने वर्ष 2012 में Section 138 NI Act के तहत दर्ज एक निजी शिकायत को खारिज कर दिया था। इसके चलते  ओडिसा की M/S ANAND WINE PVT.LTD की एमडी अमीना पाठक (आरोपी) को बरी कर दिया गया। इसके खिलाफ पीड़ित सोम डिस्टलरीज ने वर्ष 2012 में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर यह पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी।

हाईकोर्ट में मुख्य कानूनी सवाल

क्या चेक बाउंस मामले में पीड़ित/शिकायतकर्ता को CrPC की धारा 372 (अब BNSS की धारा 413) के तहत अपील करने का अधिकार है?

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि चेक बाउंस का शिकार व्यक्ति “Victim” की श्रेणी में आता है। पीड़ित चाहे शिकायतकर्ता हो या न हो, उसे सीधे अपील का अधिकार है।  ऐसे मामलों में Section 378(4) CrPC / Section 419 BNSS के तहत स्पेशल लीव लेने की जरूरत नहीं है।  

हाईकोर्ट का अहम निर्देश

सोम डिस्टलरीज की ओर से अधिवक्ता मृदुल विश्वकर्मा की दलीलें सुनकर कोर्ट ने कंपनी को यह स्वतंत्रता दी है कि वह BNSS, 2023 की धारा 413 (CrPC 372) के तहत चार महीने के भीतर सक्षम अपीलीय न्यायालय में अपील दाखिल कर सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि पहले अपील समय पर दायर की गई थी या देरी पहले ही माफ हो चुकी है, तो Limitation का मुद्दा दोबारा नहीं उठाया जाएगा।
 

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