LAW'S VERDICT

Promotion Rules 2025 पर हाईकोर्ट में सुनवाई 3 फरवरी तक टली

 SC-ST कर्मचारियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाने वाली याचिका हुई वापस  

जबलपुर। प्रमोशन में आरक्षण को लेकर मप्र सरकार द्वारा बनाये गए नियमो को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 3 फरवरी तक के लिए टल गई है। इस बीच इन नियमों के नियम  11(9)(iv) और 12(7)(iii) की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली सुरेश कुमार कुमरे की याचिका मंगलवार को सुनवाई के बाद वापस ले ली गई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आरबी राय से सम्बंधित कुछ बिंदुओं पर अगली सुनवाई पर पक्ष रखने कहा है। अगली सुनवाई 3 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे से होगी।

भोपाल की डॉ. स्वाति तिवारी व अन्य की ओर से ये 45 याचिकाएं दाखिल की गई हैं।  इन मामलों पर हाईकोर्ट में मंगलवार को करीब दो घंटे चली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश कौशिक।   राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने दलीलें रखीं। वहीं सुरेश कुमार कुमरे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता  रामेश्वर पी सिंह व अधिवक्ता विनायक शाह वस दलीले रखीं।  

SC-ST कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित करने के लगे थे आरोप

सुरेश कुमार कुमरे ने अपनी याचिका में Rules of 2025 के तहत बनाए गए Rule 11(9)(iv) और Rule 12(7)(iii) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने इन नियमों को विधिसम्मत पाते हुए उस पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया।

सुरेश कुमार कुमरे की  याचिका में आरोप लगाया था  कि इन नियमों के कारण SC-ST कर्मचारियों को मेरिट के आधार पर पदोन्नति से वंचित किया जा रहा है, जो संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। याचिका में कहा गया था कि नियमों के अनुसार पहले SC और ST वर्ग की चयन सूची तैयार की जाती है और बाद में उन्हीं SC-ST कर्मचारियों के नाम अनारक्षित (General Category) चयन सूची से हटा दिए जाते हैं, भले ही उन्होंने मेरिट के आधार पर स्थान प्राप्त किया हो। इससे आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को अनारक्षित पदों पर प्रमोशन से रोका जा रहा है। याचिकाकर्ता का दावा था कि इन नियमों के चलते General Category को 64% लाभ मिल रहा है, जबकि SC को 16% और ST को 20% तक सीमित कर दिया गया है। इस व्यवस्था के परिणामस्वरूप पदोन्नति में 100% साम्प्रदायिक (Communal) आरक्षण लागू हो जाता है, जो कानूनन स्वीकार्य नहीं है।याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि इन नियमों को असंवैधानिक घोषित किया जाए और मेरिट के आधार पर पदोन्नति का अधिकार बहाल किया जाए।

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