नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के हालिया फैसले यह संकेत देते हैं कि जांच एजेंसियों की शक्तियाँ असीमित नहीं हैं। अदालतें लगातार यह दोहरा रही हैं कि जांच के नाम पर नागरिक की निजता कुचली नहीं जा सकती।
फोन डेटा, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल निगरानी से जुड़े मामलों में कोर्ट ने न्यायिक अनुमति और आवश्यकता के सिद्धांत पर ज़ोर दिया है।
यह फैसला डिजिटल युग में नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा की दिशा तय करता है।
यह विश्लेषण बताता है कि भविष्य में जांच एजेंसियों को और ज़्यादा जवाबदेह होना पड़ेगा।
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