Supreme Court Landmark Judgment | नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (2018)
भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में Navtej Singh Johar v. Union of India (2018) को मानवाधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला माना जाता है। इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को आंशिक रूप से असंवैधानिक घोषित करते हुए वयस्कों के बीच सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया।
क्या था मामला? (Background of the Case)
इस याचिका को नवतेज सिंह जौहर, एक प्रसिद्ध नृत्यांगना (भरतनाट्यम कलाकार), सहित कई याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर किया गया था।
याचिका में दलील दी गई कि IPC की धारा 377:
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व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Article 21)
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समानता का अधिकार (Article 14)
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भेदभाव निषेध (Article 15)
का उल्लंघन करती है।
मामले में उठे मुख्य संवैधानिक प्रश्न
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क्या धारा 377 वयस्कों की निजता और गरिमा का उल्लंघन है?
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क्या सहमति से बने निजी संबंधों में राज्य का हस्तक्षेप उचित है?
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क्या यौन अभिविन्यास (Sexual Orientation) संविधान द्वारा संरक्षित है?
क्या धारा 377 वयस्कों की निजता और गरिमा का उल्लंघन है?
क्या सहमति से बने निजी संबंधों में राज्य का हस्तक्षेप उचित है?
क्या यौन अभिविन्यास (Sexual Orientation) संविधान द्वारा संरक्षित है?
सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Judgment)
5 जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया:
कोर्ट ने कहा:
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वयस्कों के बीच सहमति से बने निजी यौन संबंध अपराध नहीं हैं
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धारा 377 को इस सीमा तक असंवैधानिक घोषित किया जाता है
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LGBTQ+ समुदाय को पूर्ण संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है
वयस्कों के बीच सहमति से बने निजी यौन संबंध अपराध नहीं हैं
धारा 377 को इस सीमा तक असंवैधानिक घोषित किया जाता है
LGBTQ+ समुदाय को पूर्ण संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है
हालांकि, नाबालिगों, पशुओं या बिना सहमति के कृत्य अभी भी अपराध बने रहेंगे।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
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संविधान नैतिकता (Constitutional Morality) सामाजिक नैतिकता से ऊपर है
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बहुमत के विचार अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचल नहीं सकते
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निजता, पहचान और यौन अभिविन्यास व्यक्ति की गरिमा का हिस्सा हैं
संविधान नैतिकता (Constitutional Morality) सामाजिक नैतिकता से ऊपर है
बहुमत के विचार अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचल नहीं सकते
निजता, पहचान और यौन अभिविन्यास व्यक्ति की गरिमा का हिस्सा हैं
नवतेज जौहर केस का प्रभाव (Impact of the Judgment)
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भारत में LGBTQ+ समुदाय को कानूनी मान्यता और गरिमा मिली
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आपराधिक कानून से ऐतिहासिक मुक्ति
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मानवाधिकार और समानता पर आधारित नया न्यायिक दृष्टिकोण
भारत में LGBTQ+ समुदाय को कानूनी मान्यता और गरिमा मिली
आपराधिक कानून से ऐतिहासिक मुक्ति
मानवाधिकार और समानता पर आधारित नया न्यायिक दृष्टिकोण
भारतीय संविधान में महत्व (Constitutional Significance)
यह फैसला:
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Puttaswamy (Right to Privacy) निर्णय का विस्तार है
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समानता और स्वतंत्रता की संवैधानिक भावना को मजबूत करता है
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लोकतंत्र में अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा का उदाहरण है
निष्कर्ष (Conclusion)
Navtej Singh Johar Case ने यह स्पष्ट कर दिया कि
👉 प्यार अपराध नहीं है।
यह फैसला भारतीय संविधान, मानव गरिमा और स्वतंत्रता की जीत है।
