नई दिल्ली। शाहबानो बनाम मोहम्मद अहमद खान मामला केवल एक गुज़ारा भत्ता विवाद नहीं था, बल्कि यह सवाल था कि क्या संविधान के तहत महिला के अधिकार धर्म से कमज़ोर हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने तलाक़शुदा मुस्लिम महिला शाहबानो को भरण-पोषण देने का आदेश देते हुए कहा कि धर्म निजी आस्था का विषय है, लेकिन कानून सामाजिक न्याय का साधन है। यह फैसला समान नागरिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना गया।
हालाँकि राजनीतिक दबाव में बाद में कानून बदला गया, लेकिन यह निर्णय आज भी महिला अधिकारों और समान नागरिक संहिता की बहस का आधार बना हुआ है।
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