LAW'S VERDICT

Kesavananda Bharati Case: संविधान की ‘Basic Structure’ की रक्षा, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला,

 



Indian Constitution Landmark Judgment | केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)

भारतीय संविधान के इतिहास में Kesavananda Bharati v. State of Kerala (1973) को सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसलों में गिना जाता है। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ‘बेसिक स्ट्रक्चर सिद्धांत’ (Basic Structure Doctrine) को स्थापित किया, जिसने संसद की संशोधन शक्तियों पर ऐतिहासिक सीमा तय की।


क्या था मामला? (Background of the Case)

स्वामी केशवानंद भारती, केरल के कासरगोड स्थित एडनीर मठ के प्रमुख थे। केरल सरकार ने भूमि सुधार कानूनों के तहत मठ की संपत्तियों को अधिग्रहित किया। इसके खिलाफ स्वामी केशवानंद भारती ने अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

याचिका में तर्क दिया गया कि:

  • भूमि सुधार कानूनों ने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है

  • संसद द्वारा किए गए संवैधानिक संशोधन न्यायिक समीक्षा से परे नहीं हो सकते


मामले में उठे मुख्य सवाल (Key Constitutional Issues)

  1. क्या संसद को संविधान में असीमित संशोधन शक्ति प्राप्त है?

  2. क्या संसद संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) को बदल सकती है?

  3. क्या मौलिक अधिकारों को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है?


सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Judgment)

13 जजों की संविधान पीठ ने 7:6 के बहुमत से ऐतिहासिक निर्णय सुनाया।

कोर्ट ने कहा:

  • संसद को संविधान संशोधन की शक्ति है

  • लेकिन वह संविधान के Basic Structure को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती

  • संविधान सर्वोच्च है, संसद भी उसके अधीन है


Basic Structure में क्या शामिल है?

सुप्रीम कोर्ट ने Basic Structure की पूरी सूची तय नहीं की, लेकिन इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • संविधान की सर्वोच्चता

  • लोकतंत्र और गणराज्य

  • न्यायिक समीक्षा

  • कानून का शासन (Rule of Law)

  • धर्मनिरपेक्षता

  • संघीय ढांचा

  • मौलिक अधिकारों का सार


सरकार बनाम न्यायपालिका: शक्ति संतुलन

इस फैसले ने:

  • संसद की शक्तियों पर संवैधानिक नियंत्रण लगाया

  • न्यायपालिका को संविधान का संरक्षक बनाया

  • लोकतंत्र में शक्ति संतुलन सुनिश्चित किया


भारतीय लोकतंत्र में महत्व (Significance of the Case)

  • यह फैसला संविधान को तानाशाही संशोधनों से बचाने की ढाल बना

  • बाद के कई मामलों जैसे Minerva Mills, I.R. Coelho में इसी सिद्धांत का उपयोग हुआ

  • आज भी संविधान संशोधन की वैधता इसी फैसले के आधार पर जांची जाती है


निष्कर्ष (Conclusion)

Kesavananda Bharati Case ने यह सिद्ध कर दिया कि
👉 संसद शक्तिशाली है, लेकिन संविधान से ऊपर नहीं।
यह फैसला भारतीय लोकतंत्र और संविधान की आत्मा की रक्षा का आधार स्तंभ है।




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