LAW'S VERDICT

MP High Court ने कहा: कर्मचारियों को प्रमोशन दें, लेकिन 50% आरक्षण की सीमा न लांघें

प्रमोशन में आरक्षण को लेकर मुख्य सचिव को जिम्मेदारी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक 50% सीमा का सख्ती से पालन करने के निर्देश

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से कहा है कि कर्मचारियों को प्रमोशन दिया जा सकता है, लेकिन 50 प्रतिशत आरक्षण की निर्धारित सीमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। 

हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जब तक इस मामले में या सुप्रीम कोर्ट में लंबित आरबी राय और जरनैल सिंह मामलों में फैसला नहीं हो जाता, तब तक प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े 50 प्रतिशत के नियम का सख्ती से पालन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।

डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य ने दायर की याचिकाएं

हाईकोर्ट के ये निर्देश भोपाल की वेटरनरी सर्जन डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिए गए। याचिकाओं में सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन दिए जाने की प्रक्रिया और उसमें आरक्षण के प्रावधानों से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं ने कहा- प्रमोशन के बाद रिवर्ट करना मुश्किल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने डिवीजन बेंच को बताया कि राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों को लगातार प्रमोशन दिए जा रहे हैं। एक बार प्रमोशन मिलने के बाद संबंधित कर्मचारियों को बाद में पदावनत यानी रिवर्ट करना व्यावहारिक रूप से बेहद मुश्किल हो जाता है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने आर.बी. राय मामले का हवाला देते हुए कहा कि इस संबंध में स्पष्ट कानूनी स्थिति होने के बावजूद अब तक किसी भी प्रभावित कर्मचारी को रिवर्ट नहीं किया गया है।

इंद्रा साहनी फैसले का भी दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ फैसले में निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का उल्लेख किया। डिवीजन बेंच ने कहा कि कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार है, लेकिन दूसरी ओर आरक्षण की 50 प्रतिशत की निर्धारित ऊपरी सीमा का भी पालन आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस सीमा को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पार नहीं किया जा सकता।

मुख्य सचिव को व्यक्तिगत जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है कि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में लंबित मामलों पर अंतिम निर्णय आने तक प्रमोशन की प्रक्रिया में 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का सख्ती से पालन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने सरकार का पक्ष रखा।


हाईकोर्ट का आदेश देखें        WP-24880-2025

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