70-80-90% स्टाइपेंड का नियम खारिज, 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को मिलेगा पूरा वेतन
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि में कार्यरत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने 70%, 80% और 90% स्टाइपेंड देने की व्यवस्था को निरस्त करते हुए कहा है कि पात्र कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में 100 प्रतिशत वेतन पाने का अधिकार है।
बेंच ने मंगलवार को 12 मामलों में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने 25 नवंबर 2019 के मंत्रिपरिषद के निर्णय के आधार पर जारी किए गए उन निर्देशों और सेवा नियमों में किए गए संशोधनों को अवैध ठहराया, जिनमें नियमित वेतन के स्थान पर प्रोबेशन के तीन वर्षों में क्रमशः 70%, 80% और 90% स्टाइपेंड देने का प्रावधान किया गया था।
तीन साल की प्रोबेशन अवधि और कम स्टाइपेंड के नियम को दी गई थी चुनौती
हाईकोर्ट में दाखिल 12 याचिकाएं रीवा जिले के सेमरिया निवासी छात्र राहुल सिंह कछवाहा सहित अन्य की ओर से दायर की गई थीं। याचिकाओं में राज्य शासन द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से 25 नवंबर 2019 के मंत्रिपरिषद के निर्णय के बाद जारी सर्कुलर और विभिन्न सेवा नियमों में किए गए संशोधनों को चुनौती दी गई थी। इन प्रावधानों के तहत सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि को दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया गया था। साथ ही तीन वर्षों के दौरान मूल वेतन के बजाय पहले वर्ष 70%, दूसरे वर्ष 80% और तीसरे वर्ष 90% की दर से स्टाइपेंड देने का प्रावधान किया गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि कर्मचारी नियमित चयन प्रक्रिया और निर्धारित पात्रता पूरी करने के बाद नियुक्त होकर समान जिम्मेदारियों के साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में उनसे नियमित कर्मचारियों के समान काम लेने के बावजूद कम वेतन देना कानूनी और तार्किक रूप से उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा- समान काम के लिए कम वेतन का औचित्य नहीं
डिवीजन बेंच ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि किसी भी संस्था में कर्मचारी के काम का मूल्यांकन किया जाता है, लेकिन जब किसी प्रोबेशनर से नियमित कर्मचारी के समान काम और जिम्मेदारियां ली जा रही हों, तो उसे तीन अलग-अलग स्लैब में कम भुगतान करने का कोई उचित आधार नहीं हो सकता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई या कोई दंड लगाया जाता है, तब भी उसका वेतन निर्धारित न्यूनतम वेतनमान से नीचे नहीं किया जा सकता। ऐसे में बिना किसी गलती के केवल प्रोबेशन अवधि में कर्मचारी को कम वेतन देना उचित नहीं है।
25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन
हाईकोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त किए गए कर्मचारियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने 70%, 80% और 90% स्टाइपेंड से संबंधित प्रावधानों को निरस्त कर दिया है।
हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश
1. 70-80-90% स्टाइपेंड का प्रावधान रद्द
25 नवंबर 2019 के मंत्रिपरिषद के निर्णय के आधार पर जारी निर्देशों, संबंधित सर्कुलर और सेवा नियमों में किए गए उन संशोधनों को रद्द कर दिया गया है, जिनमें प्रोबेशन अवधि के दौरान 70%, 80% और 90% भुगतान का प्रावधान था।
2. प्रोबेशन में मिलेगा पूरा वेतन
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त शासकीय कर्मचारियों को उनकी परिवीक्षा अवधि में किए गए कार्य के एवज में 100% वेतन दिया जाए।
3. कम भुगतान या रिकवरी की राशि लौटानी होगी
जिन कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में निर्धारित वेतन से कम राशि का भुगतान किया गया है या जिनके वेतन से किसी राशि की वसूली की गई है, उस कार्रवाई को भी अदालत ने अवैध माना है। यदि किसी कर्मचारी से राशि की कटौती या वसूली की गई है, तो उसे संबंधित कर्मचारी को वापस लौटाना होगा।
सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण असर
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला प्रोबेशन अवधि में कार्यरत उन शासकीय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें 70%, 80% और 90% की दर से स्टाइपेंड का भुगतान किया गया था। फैसले के बाद ऐसे कर्मचारियों के वेतन और पूर्व में की गई वसूली से जुड़े मामलों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल के साथ अधिवक्ता विजय कुमार शुक्ला, राहुल दिवाकर, ईशान सोनी, सीतेन्द्र कुमार विश्वकर्मा, अमित शुक्ला और अंशुल तिवारी ने पैरवी की।
