Contempt Case: जमानती वारंट जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुए दोनों अधिकारी, हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
Laws Verdict News | जबलपुर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अवमानना मामले में जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दमोह के पुलिस अधीक्षक (SP) और सागर के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 22 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में दोनों अधिकारी उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा।
पूर्व एएसआई ने लगाया है मामला
हाईकोर्ट का यह आदेश सागर में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किए गए असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर करन सिंह ठाकुर की ओर से दायर अवमानना याचिका पर आया है। दरअसल, रिश्वत मांगने की शिकायत के मामले में विभागीय कार्रवाई करते हुए करन सिंह ठाकुर को 26 अक्टूबर 2015 को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा दी गई थी। उन्होंने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 30 नवंबर 2023 को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश निरस्त कर दिया था। कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिया था कि सजा के मुद्दे पर 90 दिनों के भीतर नए सिरे से निर्णय लिया जाए।
आदेश का पालन नहीं होने पर दायर हुई अवमानना याचिका
याचिकाकर्ता का आरोप था कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद विभाग की ओर से निर्धारित अवधि में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आदेश का पालन नहीं होने पर करन सिंह ठाकुर ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को उपस्थित होने के निर्देश दिए थे।
जमानती वारंट के बाद भी कोर्ट में नहीं पहुंचे
मामले में 24 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दमोह एसपी और सागर डीआईजी के खिलाफ 100-100 रुपये के जमानती वारंट जारी किए थे। इसके बावजूद मंगलवार को हुई अगली सुनवाई में दोनों अधिकारी अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। दोनों अधिकारियों की गैरहाजिरी पर जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को 22 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
गैरहाजिरी पर गिरफ्तारी वारंट
हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को सशर्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगली सुनवाई में उनकी गैरहाजिरी को गंभीरता से लिया जाएगा और यदि वे निर्धारित तारीख पर अदालत में उपस्थित नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है।
अब इस मामले में 22 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, जिसमें दमोह एसपी और सागर डीआईजी की व्यक्तिगत उपस्थिति पर हाईकोर्ट का रुख साफ होगा।
