लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
राजधानी के चर्चित स्कॉटिश गार्डन प्रोजेक्ट से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्य भू-स्वामी अशोक गोयल को नियमित जमानत दे दी है। जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की अदालत ने जांच पूरी होने, चार्जशीट दाखिल होने और जांच में आरोपी के सहयोग को देखते हुए यह राहत दी। कोर्ट ने अशोक गोयल को ₹1 लाख के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की सॉल्वेंट स्योरिटी पर रिहा करने का आदेश दिया है।
16 साल पुराने लेनदेन से जुड़ा है मामला
मामला भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम नेवारी में विकसित किए जा रहे स्कॉटिश गार्डन आवासीय टाउनशिप से जुड़ा है। आरोपों के अनुसार, वर्ष 2010-11 के दौरान कई लोगों ने इस प्रोजेक्ट में प्लॉट बुक किए थे। बाद में आरोप लगाया गया कि जमीन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी खरीदारों से छिपाई गई और उन्हें समय पर प्लॉट का कब्जा और रजिस्ट्री नहीं दी गई। इस मामले में वर्ष 2026 में BNS की धारा 318(4) और 61(1) के तहत FIR दर्ज की गई थी।
जमीन मालिक ने कहा- प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी बिल्डर की थी
अशोक गोयल की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर और विजय कुमार चौधरी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि आवेदक केवल जमीन के मालिक थे। उन्होंने वर्ष 2006/2008 में Niho Construction Limited के साथ Development Agreement किया था। इसके बाद प्रोजेक्ट के विकास, निर्माण, मार्केटिंग, ग्राहकों से पैसा लेने और आवश्यक अनुमतियां लेने की जिम्मेदारी बिल्डर कंपनी की थी। बचाव पक्ष ने कहा कि अशोक गोयल ने सीधे किसी खरीदार से पैसे नहीं लिए और न ही खुद कोई प्लॉट बेचा।
भू-स्वामियों ने पहले ही की थी शिकायत
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि बिल्डर कंपनी द्वारा किए गए कथित अनुबंध उल्लंघन को लेकर भू-स्वामियों ने पहले से ही Commercial Court में सिविल मुकदमा दायर कर रखा है। पुलिस में भी शिकायतें की गई थीं। इस आधार पर दलील दी गई कि आवेदक को खरीदारों के साथ हुए कथित लेनदेन के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
जांच में सहयोग को हाईकोर्ट ने माना अहम
हाईकोर्ट ने जमानत देते समय इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि मामला करीब 16 साल पुराने लेनदेन से जुड़ा है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस जांच के दौरान अशोक गोयल को गिरफ्तार करने की आवश्यकता नहीं समझी गई। उन्होंने BNSS की धारा 35(3) के तहत जारी नोटिस का पालन किया और जांच में सहयोग किया। इस दौरान पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट भी दाखिल कर दी।
स्वास्थ्य और पारिवारिक स्थिति भी देखी
हाईकोर्ट ने आरोपी की स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया। बचाव पक्ष की ओर से बताया गया कि अशोक गोयल की हृदय संबंधी बीमारी के कारण बाईपास सर्जरी हो चुकी है। इसके अलावा उनके 93 वर्षीय बीमार पिता की देखरेख की जिम्मेदारी भी उन पर है। इन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने नियमित जमानत का लाभ दिया।
₹1 लाख के मुचलके पर रिहाई
सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने अशोक गोयल की नियमित जमानत याचिका स्वीकार कर ली। उन्हें ₹1 लाख के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की सॉल्वेंट स्योरिटी पर रिहा करने का आदेश दिया गया है।
