हाईकोर्ट ने दिए 10 दिन में ब्याज सहित भुगतान का आदेश
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
अनूपपुर जिले में करीब 10 साल पहले अधिग्रहित की गई 10 किसानों की जमीन का मुआवजा अब तक नहीं मिलने पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि मुआवजा पाने के लिए प्रभावित लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने अनूपपुर कलेक्टर, NHAI और MPRDC को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता किसानों को 10 दिनों के भीतर ब्याज सहित पूरा मुआवजा भुगतान किया जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं होने पर कलेक्टर के साथ दोनों सरकारी एजेंसियों के एमडी को भी कोर्ट में तलब किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को होगी।
2016-17 में जमीन अधिग्रहित, अब तक मुआवजे का इंतजार
हाईकोर्ट ने ये निर्देश अनूपपुर जिले के कोतमा थाना क्षेत्र के ग्राम बुरहानपुर निवासी ज्ञान सिंह और 9 अन्य किसानों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर दिए। याचिकाकर्ताओं की जमीनें नेशनल हाईवे-43 के चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2016-17 में अधिग्रहित की गई थीं। जमीन अधिग्रहण के बाद भी किसानों को मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया। मुआवजा नहीं मिलने के कारण प्रभावित किसानों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
‘दोनों सरकारी एजेंसियां हैं, किसान क्यों भटके?’
सुनवाई के दौरान NHAI और MPRDC के बीच मुआवजे की राशि के भुगतान को लेकर जिम्मेदारी तय करने की स्थिति सामने आई। इस पर हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि दोनों ही सरकारी एजेंसियां हैं। कोर्ट ने कहा कि किसान को इस विवाद में नहीं उलझाया जा सकता कि पैसा कौन देगा। बेंच ने निर्देश दिया कि दोनों में से कोई एक सरकारी एजेंसी पहले प्रभावित किसानों को मुआवजे का भुगतान करे और इसके बाद दोनों एजेंसियां आपस में राशि का हिसाब-किताब कर सकती हैं।
10 दिन की डेडलाइन, नहीं तो अधिकारी होंगे तलब
हाईकोर्ट ने अनूपपुर कलेक्टर, NHAI और MPRDC को 10 दिनों के भीतर ब्याज सहित पूरा मुआवजा भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो कलेक्टर के साथ NHAI और MPRDC के एमडी को भी कोर्ट में तलब किया जाएगा।
किसानों की शिकायत पर SDM को किया गया था सस्पेंड
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता किसानों की शिकायतों के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कोतमा के भू-अर्जन अधिकारी एवं SDM मिलिंद नागदेव को निलंबित किया था। इस पर हाईकोर्ट ने अनूपपुर कलेक्टर को निर्देश दिया कि SDM के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
अधिवक्ताओं ने रखी दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और पैनल अधिवक्ता अन्वेष श्रीवास्तव तथा MPRDC की ओर से अधिवक्ता अंकित कुमार पाण्डेय ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट के इस आदेश से करीब एक दशक से मुआवजे का इंतजार कर रहे याचिकाकर्ता किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
