LAW'S VERDICT

‘टू-व्हीलर और ऑटो से ढुल गया 50 क्विंटल सरकारी चावल!’

हाईकोर्ट हुआ सख्त, 27 कलेक्टरों को दिए घोटाले की जांच के आदेश

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

मध्यप्रदेश में सरकारी चावल परिवहन में कथित घोटाले को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में सरकारी चावल परिवहन और आपूर्ति में हुई अनियमितताओं की जांच करने के निर्देश दिए हैं। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मामले में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के सीएमडी की भूमिका और EOW द्वारा दर्ज मामलों को भी गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने सीएमडी और EOW से भी जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

जबलपुर में सामने आया 43 करोड़ का घोटाला

यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे और धनीराम लखेरा की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि धान के परिवहन और आपूर्ति के लिए GPS आधारित निगरानी के स्पष्ट दिशा-निर्देश पहले से मौजूद थे, लेकिन बड़े पैमाने पर इन नियमों को दरकिनार कर सरकारी चावल और धान के परिवहन में अनियमितताएं की गईं। जबलपुर कलेक्टर की कार्रवाई में 43.03 करोड़ रुपए के धान परिवहन घोटाले का खुलासा हुआ था। इसके बाद कई FIR दर्ज की गईं और मामले में कई आरोपियों को जेल भी भेजा गया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि घोटाला केवल जबलपुर तक सीमित नहीं हो सकता और प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इसी तरह की गड़बड़ियों की आशंका है।

‘सिर्फ जबलपुर में 43 करोड़ रुपए का घोटाला ’

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने डिवीजन बेंच को बताया कि रिकॉर्ड में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां टू-व्हीलर और ऑटो के जरिए 50 क्विंटल सरकारी चावल का परिवहन दर्शाया गया। उन्होंने बताया कि इस तरह की गड़बड़ी सामने आने के बाद जबलपुर कलेक्टर ने विस्तृत जांच कराई और 10 जुलाई 2025 को रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में करीब 43 करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि अकेले जबलपुर में 91 FIR दर्ज की गई हैं। उनका तर्क था कि जब एक जिले में अनियमितताओं का आंकड़ा इतना बड़ा है तो प्रदेश के अन्य जिलों की स्थिति की भी जांच जरूरी है।

‘कलेक्टर सजग नहीं होते तो घोटाला सामने नहीं आता’

सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने जबलपुर कलेक्टर की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कलेक्टर सजग नहीं होते तो इस घोटाले का खुलासा ही नहीं हो पाता। बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया निगम और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से इस तरह की गड़बड़ी को अंजाम दिए जाने की बात सामने आई है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब घोटाला सामने आया था, तब नागरिक आपूर्ति निगम के सीएमडी की जिम्मेदारी थी कि मामले की जांच कराई जाती। इतने गंभीर मामले में निगम या उसके अधिकारी चुप नहीं रह सकते थे।

27 कलेक्टरों से हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में सरकारी चावल से संबंधित अनियमितताओं की जांच करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से यह पता लगाने को कहा है कि उनके जिले में सरकारी चावल के परिवहन और आपूर्ति में कितने रुपए का घोटाला या वित्तीय अनियमितता हुई है।

EOW और निगम के CMD से भी जवाब तलब

हाईकोर्ट ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से भी उसके द्वारा दर्ज FIR की जांच की वर्तमान स्थिति बताने को कहा है। वहीं खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के CMD से जवाब मांगा गया है कि जबलपुर में घोटाला सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ उनकी ओर से क्या कार्रवाई की गई।

किसे क्या निर्देश?

जिला कलेक्टर:
अपने-अपने जिलों में सरकारी चावल के परिवहन और आपूर्ति में हुई कथित अनियमितता की जांच कर बताएं कि कितने रुपए का घोटाला हुआ।

EOW:
दर्ज FIR की जांच अब तक कहां तक पहुंची, इसकी जानकारी कोर्ट को दें।

नागरिक आपूर्ति निगम के CMD:
जबलपुर में घोटाला सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसका जवाब दें।

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच और जवाब प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी।

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