LAW'S VERDICT

हाईकोर्ट ने सरकार को दिखाया आईना, कहा- भू माफिया की तरह काम कर रहा राजस्व विभाग

2 किसानों की जमीन के कथित अधिग्रहण पर हाईकोर्ट ने डिंडोरी कलेक्टर से 3 दिन में मांगा जवाब

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

डिंडौरी जिले में किसानों की जमीन पर बिना मुआवजा दिए सड़क बनाए जाने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर टिप्पणी की है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीज़न बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया राज्य सरकार की ‘इंटेलेक्चुअल डिसऑनेस्टी’ यानी बौद्धिक बेईमानी साफ नजर आ रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने डिंडौरी कलेक्टर को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। कलेक्टर को पुराने और नए राजस्व नक्शे के साथ संबंधित खसरों की सीमांकन रिपोर्ट भी पेश करनी होगी। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में दस्तावेज पेश नहीं किए गए तो कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।

बिना मुआवजे जमीन पर सड़क बनाने का आरोप

हाईकोर्ट ने ये निर्देश डिंडौरी जिले की बजाग तहसील के ग्राम मोहतरा निवासी अंबिका प्रसाद तिवारी और उनके पुत्र जितेन्द्र तिवारी की याचिका पर दिए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके पास खसरा नंबर 1181 में 1.410 हेक्टेयर और खसरा नंबर 1106 में 0.11 हेक्टेयर भूमि है। आरोप है कि उनकी जमीन पर बिना अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाए और बिना मुआवजा दिए नेशनल हाईवे का निर्माण कर दिया गया।

सरकारी रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अभिषेक सिंह ने राजस्व निरीक्षक, करंजिया डिवीजन, गोरखपुर, तहसील बजाग की रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी। रिपोर्ट में खसरा नंबर 1181 में 0.192 हेक्टेयर भूमि की कमी बताई गई और कहा गया कि इसकी भरपाई खसरा नंबर 1260 से की जा सकती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि यह कमी पांच साल से अधिक समय से चली आ रही है। सरकार की ओर से एक अन्य रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि ग्राम मोहतरा का पुराना सर्वे नंबर 107, रकबा 7.89 हेक्टेयर, सरकारी सड़क के रूप में दर्ज है और वर्तमान में भी सड़क के रूप में दर्ज है, जिस पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा सड़क बनाई जा रही है।

‘सड़क सर्वे नंबर 107 पर है तो आसपास की जमीन कैसे तय होगी?’

कोर्ट ने सरकारी रिपोर्ट में कई गंभीर कमियां पाईं। बेंच ने सवाल उठाया कि यदि सड़क सर्वे नंबर 107 पर स्थित होना स्वीकार किया गया है तो उसके आसपास की जमीनों की स्थिति स्थापित करने के लिए राजस्व नक्शा और सीमांकन रिपोर्ट कहां है? कोर्ट ने पाया कि सर्वे नंबर 107 का नया नंबर तक नहीं बताया गया है। इसके अलावा पुराने और नए राजस्व नक्शे भी रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं कराए गए। खसरा नंबर 1181 और 1106 का कोई सीमांकन रिपोर्ट भी पेश नहीं किया गया।

‘हॉच-पॉच और fabricated रिपोर्ट तैयार की गई’

हाईकोर्ट ने सरकारी रिकॉर्ड की स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि ‘हॉच-पॉच’ और fabricated रिपोर्ट एसडीओ द्वारा तैयार की गई प्रतीत होती है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता धर्मेश चतुर्वेदी ने कोर्ट को बताया कि नायब तहसीलदार की रिपोर्ट भी फर्जी और कूटरचित है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के साथ न तो कोई सीमांकन रिपोर्ट लगाई गई और न ही पुराना या नया राजस्व नक्शा। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर ये रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गईं और राजस्व अधिकारियों ने इन रिपोर्टों को तैयार करने में कितनी सावधानी बरती।

2024 की राजस्व निरीक्षक रिपोर्ट ने बढ़ाई सरकार की मुश्किल

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि राजस्व निरीक्षक ने 24 अप्रैल 2024 को अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा था कि खसरा नंबर 1181 में से 0.20 हेक्टेयर भूमि याचिकाकर्ताओं की प्रभावित हो रही है। कोर्ट ने गौर किया कि राजस्व निरीक्षक की इस रिपोर्ट का सरकार की ओर से कोई प्रभावी खंडन रिकॉर्ड पर नहीं है।

‘चार गुना मुआवजे का वादा, किसान की जमीन पर बिना भुगतान कब्जा!’

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता धर्मेश चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया कि एक तरफ राज्य के मुख्यमंत्री किसानों की जमीन के अधिग्रहण पर चार गुना मुआवजा देने का दावा कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर सरकारी अधिकारी ही किसानों की जमीन बिना मुआवजा दिए सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। अधिवक्ता श्री चतुर्वेदी ने राजस्व अधिकारियों पर हाईकोर्ट के समक्ष गलत रिपोर्ट पेश करने और भ्रष्ट आचरण का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि एक ओर सरकार किसानों के हित में बड़े-बड़े वादे कर रही है, वहीं दूसरी ओर किसान की जमीन को बिना वैधानिक अधिग्रहण और मुआवजे के कब्जे में लेने की कोशिश की जा रही है।

कलेक्टर से पूछा- राजस्व अधिकारियों पर अवमानना क्यों न चले?

मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने डिंडौरी कलेक्टर को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। कलेक्टर को 

  • पुराने और नए राजस्व नक्शे पेश करने होंगे।
  • खसरा नंबर 1181 और 1106 की सीमांकन रिपोर्ट देनी होगी।
  • मौके की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
  • यह बताना होगा कि संबंधित राजस्व अधिकारियों द्वारा तैयार दस्तावेजों के आधार पर अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

कोर्ट ने कलेक्टर को तथ्यों की व्यक्तिगत रूप से पुष्टि करने का निर्देश दिया है।

‘कलेक्टर को मौका दे रहे हैं, सच सामने लाएं’

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया राज्य सरकार की ओर से बौद्धिक बेईमानी स्पष्ट दिखाई दे रही है। हालांकि कोर्ट ने कलेक्टर को स्थिति स्पष्ट करने और तथ्यों के साथ सामने आने का अवसर दिया है। कलेक्टर को सभी दस्तावेज 14 अगस्त 2026 तक दाखिल करने का आदेश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को सूची में सबसे ऊपर होगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय पर दस्तावेज पेश नहीं किए गए तो डिंडौरी कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा।


हाईकोर्ट का आदेश देखें       WP-38849-2024

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