LAW'S VERDICT

अधारताल हत्याकांड: युवक की मौत के मामले में 4 दोषियों को उम्रकैद, 50-50 हजार रुपए जुर्माना

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

अधारताल क्षेत्र में मारपीट के दौरान गंभीर रूप से घायल युवक की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) के तहत दर्ज किया गया था। अपर सत्र न्यायाधीश केके मिश्रा की अदालत ने गुरुवार को सुनवाई पूरी होने के बाद चारों आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए यह फैसला सुनाया।

विवाद के बाद युवक पर किया जानलेवा हमला

मामला 9 जून 2025 का है। फरियादी राज कोल अपने दोस्त साहिल कोल के साथ स्वास्तिक अस्पताल गया था। वहां उसे पता चला कि साहिल के पिता का मोहल्ले में किसी व्यक्ति से विवाद हो गया है। इसके बाद राज और साहिल रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंचे। थाने से लौटने के बाद साहिल के कहने पर राज उसके घर का दरवाजा बंद करने जा रहा था। इसी दौरान साहिल के घर के पास गोविन्द, बेटू, प्रांशु और राजन मिले। आरोपियों ने राज के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। राज द्वारा विरोध करने पर विवाद बढ़ गया।

लोहे के पाइप से सिर पर किया वार

अभियोजन के अनुसार, गोविन्द कोल ने लोहे के पाइप से राज के सिर पर वार कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हो गया। वहीं अन्य आरोपियों बेटू, प्रांशु और राजन ने भी राज के साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट की। हमले के बाद आरोपी उसे जान से मारने की धमकी देकर मौके से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर राज के मामा संजू कोल उसे थाने लेकर गए। गंभीर हालत में राज का अस्पताल में इलाज कराया जा रहा था।

6 दिन बाद इलाज के दौरान हुई मौत

घटना के बाद घायल राज का अस्पताल में इलाज चलता रहा, लेकिन 15 जून 2025 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक की मौत के बाद पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) यानी हत्या का आरोप जोड़ा। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में पेश किया।

चारों आरोपियों को उम्रकैद

मामले की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश केके मिश्रा की अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी पाया। अदालत ने गोविन्द, बेटू, प्रांशु और राजन को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक वर्षा वैद्य ने पैरवी की।

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