LAW'S VERDICT

गैर-मानक स्पीड ब्रेकरों से टूट रही लोगों की कमर, गाड़ियों को भी नुकसान; हाईकोर्ट का नोटिस

जनहित याचिका में अवैध और अमानक स्पीड ब्रेकर हटाने की मांग, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब 

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़ | जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश की सड़कों पर कथित तौर पर नियमों के विपरीत बनाए जा रहे गैर-मानक स्पीड ब्रेकरों को लेकर दायर जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सड़कों पर बने अमानक स्पीड ब्रेकरों के कारण लोगों को शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और वाहनों को भी नुकसान हो रहा है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को प्रारंभिक सुनवाई के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।

बिना अनुमति बनाए जा रहे स्पीड ब्रेकरों का आरोप

यह जनहित याचिका जबलपुर के गंगानगर निवासी अधिवक्ता कार्तिकेय लखेरा की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि पूरे मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर निजी व्यक्तियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और विभिन्न संस्थाओं द्वारा बिना वैधानिक अनुमति के मनमाने तरीके से स्पीड ब्रेकर बनाए जा रहे हैं। याचिका में ऐसे स्पीड ब्रेकरों को अवैधानिक बताते हुए उन्हें हटाने के निर्देश देने की मांग की गई है।

सरकारी स्पीड ब्रेकर भी मानकों पर खरे नहीं?

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा बनाए गए कई स्पीड ब्रेकर भी निर्धारित इंजीनियरिंग मानकों, डिजाइन, ऊंचाई, चौड़ाई, मार्किंग और दृश्यता संबंधी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक गैर-मानक स्पीड ब्रेकर सड़क सुरक्षा के उद्देश्य को पूरा करने के बजाय दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। इनसे आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होने का दावा करते हुए याचिका में कहा गया है कि लोगों को गंभीर चोटें लग रही हैं, जिनमें रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं। इसके अलावा दोपहिया और चारपहिया वाहनों को भी नुकसान पहुंच रहा है।

एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की रफ्तार पर भी असर

याचिका में गैर-मानक स्पीड ब्रेकरों से आपातकालीन सेवाओं के प्रभावित होने का भी दावा किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार खराब डिजाइन और अत्यधिक ऊंचाई वाले स्पीड ब्रेकरों के कारण एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी सेवाओं का रिस्पॉन्स टाइम बढ़ सकता है। इससे सामान्य यातायात भी प्रभावित होता है और आपात स्थिति में मरीजों या घटनास्थल तक पहुंचने में देरी हो सकती है।

मोटर यान नियम और IRC गाइडलाइन के उल्लंघन का दावा

याचिका में दावा किया गया है कि इस तरह के अमानक स्पीड ब्रेकर मध्य प्रदेश मोटर यान नियम, 1994 के नियम 219 तथा इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के विपरीत हैं। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि प्रदेश में अवैध रूप से बनाए गए और निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले स्पीड ब्रेकरों की पहचान कर उन्हें हटाने तथा भविष्य में निर्धारित मानकों के अनुसार ही स्पीड ब्रेकर बनाए जाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएं। अब केंद्र और राज्य सरकार का जवाब आने के बाद हाईकोर्ट इस जनहित याचिका पर आगे की सुनवाई करेगा।


हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-32550-2026

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